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Bihar news : “गधे पर भी चढ़ सकते हैं ... ", वैशाली में पूर्व विधायक मुकेश रौशन का विवादित बयान, बोले - “लाल से सांड तो हरे से भाजपाई भड़कते

वैशाली के भगवानपुर में राजद के पूर्व विधायक मुकेश रौशन के विवादित बयान से सियासत गरमा गई। बयान में ‘हनीमून पीरियड’, बेरोजगारी और महंगाई पर की गई टिप्पणी चर्चा में है।

Bihar news  :  “गधे पर भी चढ़ सकते हैं ... ", वैशाली में पूर्व विधायक मुकेश रौशन का विवादित बयान, बोले - “लाल से सांड तो हरे से भाजपाई भड़कते
Tejpratap
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Bihar news  : वैशाली जिले के भगवानपुर क्षेत्र में एक निजी कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के महुआ से पूर्व विधायक मुकेश रौशन द्वारा दिए गए बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। उनके कथनों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों में चर्चा तेज हो गई है।


कार्यक्रम के दौरान मुकेश रौशन ने केंद्र और राज्य सरकार के मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज की स्थिति में नेता और मंत्री एक तरह से “हनीमून पीरियड” में हैं। उनके अनुसार सत्ता में आने के शुरुआती समय में कई नेता और मंत्री बिना किसी बड़े दबाव के काम करते हैं और इस दौरान वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे हालात में नेता “गधे पर भी चढ़ सकते हैं”, जिससे वहां मौजूद लोगों के बीच हल्की प्रतिक्रिया और बाद में राजनीतिक हलचल देखने को मिली।


मुकेश रौशन ने कहा यह सरकार जो बैठी है वह बहरी, गुंगी और अंधी सरकार है। इसको देखना चाहिए कि कितने लोग नौजवान जो महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं, उनको नौकरी और रोजगार के लिए आपके पास क्या रोडमैप है उसको बताना चाहिए। आपके पास कितना source of income है बिहार में उस पर चर्चा होनी चाहिए ना कि हरा गमछा और लाल गमछा पर चर्चा होना चाहिए। जैसे जैसे एक बात मैं बता दूं कि लाल रंग का कपड़ा देख करके सांड भड़कता है तो हरा रंग का कपड़ा देख कर भाजपाई भड़कता है। 


मुकेश रौशन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत से जुड़ी अपील का जिक्र किया और उस पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में जनता से लेकर नेताओं तक सभी को ऐसे संदेशों पर अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया देनी पड़ती है, लेकिन असल मुद्दों से ध्यान नहीं हटना चाहिए।


अपने बयान में उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए राजनीतिक दलों के बीच रंगों की राजनीति पर टिप्पणी की। रौशन ने कहा कि जिस तरह लाल रंग देखकर सांड भड़क जाता है, उसी तरह कुछ लोग हरे रंग को देखकर आक्रोशित हो जाते हैं। यह टिप्पणी सीधे तौर पर भाजपा समर्थकों की ओर इशारा मानी जा रही है, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।


उन्होंने आगे कहा कि बिहार की नई सरकार अभी शुरुआती दौर में है और यह “हनीमून पीरियड” चल रहा है। इस दौरान सरकार पर अपेक्षाकृत कम दबाव होता है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, जनता की अपेक्षाएं बढ़ती हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस अवधि के बाद उसे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।


पूर्व विधायक ने विशेष रूप से बेरोजगारी और महंगाई को सबसे गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि इन मुद्दों पर राजनीतिक बहस कम और ठोस काम अधिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के समय में बेरोजगारी सबसे बड़ा “दल” बन चुकी है, जो समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही है।


उन्होंने युवाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि बिहार में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इस दिशा में ठोस नीति की जरूरत है। रौशन ने सरकार से मांग की कि रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जाए और महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।


उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रिया का दौर शुरू हो गया है। सत्तापक्ष के समर्थक इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बता रहे हैं, जबकि विपक्ष के कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर बहस तेज हो गई है।


हालांकि, मुकेश रौशन के इस बयान ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में जुबानी जंग को हवा दे दी है। स्थानीय स्तर पर लोग इसे चुनावी और राजनीतिक बयानबाजी से जोड़कर देख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस बयान का राजनीतिक असर आगे किस रूप में सामने आता है और क्या यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ता है या नहीं।