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गुप्तेश्वर पांडे की कहानी : टिकट की रेस में हवलदार से हार गए DGP

PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव में बक्सर सीट को हॉट सीट माना जा रहा है. इस सीट से चुनाव लड़ने का सपना संजोकर पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने वीआरएस ले लिया था. वीआरएस लेने के तुरंत बाद गुप्तेश्वर पा

गुप्तेश्वर पांडे की कहानी :  टिकट की रेस में हवलदार से हार गए DGP
Anamika
2 मिनट

PATNA : बिहार विधानसभा चुनाव में बक्सर सीट को हॉट सीट माना जा रहा है. इस सीट से चुनाव लड़ने का सपना संजोकर पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने वीआरएस ले लिया था. वीआरएस लेने के तुरंत बाद गुप्तेश्वर पांडे ने जेडीयू की सदस्यता ले ली थी और बक्सर सीट को लेकर सियासी पिच तैयार करने में जुट गए थे. 

लेकिन उनका ये प्लान पूरी तरह से फ्लॉप हो गया. टिकट की रेस में बिहार के पूर्व डीजीपी बिहार के ही एक पूर्व सिपाही से  हार गए. एक समय में सिपाही रह चुके परशुराम चतुर्वेदी ने ऐसा समीकरण सेट किया कि गुप्तेश्वर पांडे का पूरा सपना ही अधूरा रह गया.  डीजीपी का पद छोड़कर विधानसभा पहुंचने के उनके अरमानों पर पानी फिर गया. 

बीजेपी की सीट पर बक्सर सीट से चुनाव लड़ रहे परशुराम चतुर्वेदी की कहानी भी बड़ी रोचक है. परशुराम चतुर्वेदी भी बिहार पुलिस से वीआरएस ले चुके हैं. 1994 में परशुराम चतुर्वेदी बिहार पुलिस में मुजफ्फरपुर में सिपाही के पद पर तैनात थे. लेकिन शुरू से ही उनकी रुची राजनीति में थी और उन्हें पुलिस विभाग की नौकरी रास नहीं आ रही थी. इसी दौरान वे बीजेपी से जुड़ गए और नौकरी से वीआरएस ले लिया. बक्सर के महदह के रहने वाले परशुराम चतुर्वेदी 1991 से बक्सर से बीजेपी के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं और इनकी पहचान स्वंयसेवी के तौर पर होती है.परशुराम चतुर्वेदी कई जिलों में पार्टी के चुनाव का भी काम देख चुके हैं.गुरुवार को उन्होंने बक्सर सीट से नामांकन दाखिल किया. इसके साथ ही नौकरी से वीआरएस ले चुके गुप्तेश्वर पांडे का विधायक बनने का सपना अधूरा रह गया.