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श्रमिक कानूनों का गंभीरता से होगा अनुपालन, सरकार पांच सौ कारखानों में कराएगी सेफ्टी ऑडिट

PATNA: बिहार राज्य के निबंधित कल-कारखानों में सेफ्टी ऑडिट जरुरी होगा। तकरी साढ़े आठ हजार औद्योगिक इकाइयों में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीरता से श्रमिक कानूनों का

श्रमिक कानूनों का गंभीरता से होगा अनुपालन, सरकार पांच सौ कारखानों में कराएगी सेफ्टी ऑडिट
Desk
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PATNA: बिहार राज्य के निबंधित कल-कारखानों में सेफ्टी ऑडिट जरुरी होगा। तकरी साढ़े आठ हजार औद्योगिक इकाइयों में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीरता से श्रमिक कानूनों का अनुपालन कराने में जुटी हुई है। श्रम संसाधन विभाग ने सभी संबंधित इकाईयों में लगभग ढाई लाख कार्यरत कामगारों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्पेशल सेफ्टी कमेटी का गठन किया गया है। 


श्रम संसाधन विभाग के अनुसार हर कल-कारखाने में सेफ्टी कमेटी का गठन करना अनिवार्य है, जिसका कार्यकाल तीन साल का होगा। कमेटी की बैठक हर तीन महीने पर किया जाए। कमेटी के कारखाने में कर्मियों का अनिवार्य रूप से प्रतिनिधित्व होना चाहिए। इस व्यवस्था को निबंधित कल-कारखानों में सख्ती से अनुपालन किया जाए। इस संबंध में कारखाना प्रबंधन की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। और कार्यस्थल पर कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश सिया गया है। निबंधित कर्मचारी यूनियनों को भी कहा गया कि सेफ्टी कमेटी के उद्देश्य पर अमल कराने में सभी अपनी भागीदारी दे। 


कमेटी में शामिल है ये कर्मचारी

एक महिला कर्मी और एक पुरुष कर्मी, प्रबंधन से एक पदाधिकारी, जो समय पर निर्णय लेने में सक्षम हो, एक मेडिकल अफसर, एक सेफ्टी अफसर, प्रोडक्शन से जुड़े एक कर्मी। जिस कारखाने में निबंधित यूनियन एक्टिव नहीं है वहां पर कमेटी गठन में सदस्यों का चुनाव कामगारों के जरिए किया जाए।  


यह है कमेटी की भूमिका

कामगारों की सुरक्षा को ध्यान में रखना अनिवार्य है। कमेटी की अनुशंसाओं को प्रबंधन के माध्यम से लागू कराना होगा। समय से वेतन भुगतान देना, बकाया भुगतान, स्किल डेवलपमेंट संबंधी प्रशिक्षण और प्रोन्नति से जुड़े सभी मुद्दों पर विशेष ध्यान रखना होगा। कामगारों में सुरक्षा से संबंधित जागरूकता फैलाने का काम करना होगा। स्वास्थ्य लाभ और सुरक्षा नीति का पालन करना होगा। 

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