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Success Story: राशन दुकानदार की बेटी बनी पायलट, हौसलों को उड़ान देने के लिए पिता बेच दी जमीन; रंग लाई ताईबा अफरोज की मेहनत

Success Story: बिहार के सारण की रहने वाली ताईबा अफरोज ने वह कर दिखाया है जो अच्छे-अच्छों के लिए किसी सपने से कम नहीं है. बेटी के सपने को साकार करने के लिए पिता ने अपनी प्रॉपर्टी तक बेच दी.

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ताईबा अफरोज की सफलता की कहानी
© reporter
Mukesh Srivastava
4 मिनट

Success Story: अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाहत हो और इसमें परिवार का भी सहयोग मिल जाए तो हौसलों को उड़ान मिल जाती है। कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के सारण की रहने वाली ताईबा अफरोज की। ताईबा को बचपन से ही पायलट बनने का शौक था। राशन की दुकान चलाने वाले ताईबा के पिता ने बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी प्रॉपर्टी तक बेच दी और एक दिन ताईबा की मेहनत रंग लाई और अब वह खुले आसमान में पंख फैलाकर उड़ने को तैयार है।


दरअसल, सारण के मढ़ौरा स्थित जलालपुर निवासी मोतीउल हक और समसुन निशा की बेटी ताईबा अफरोज अब कमर्शियल पायलट बन गई हैं। इन्हें डीडीसीए से जरूरी लाइसेंस प्राप्त हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर इस मुकाम पर पहुंचने वाली ताईबा अफरोज मढ़ौरा की पहली महिला पायलट हैं। जिसपर इनके परिजनों के साथ-साथ पूरे मढ़ौरा को गर्व है। 


इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद ताईबा आसमान में उड़ने की चाहत के कारण पायलट बनने की ठान ली और पारिवारिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बगैर इस ओर कदम बढ़ा दिया। ताईबा के पिता मढ़ौरा के मुबारकपुर नया बाजार पर एक राशन की दुकान चलाते हैं जबकि माता एक घरेलू महिला है। ताईबा की एक छोटी बहन है जो फिलहाल पटना में रहकर बीपीएससी की तैयारी कर रही है। 


ताईबा ने पायलट बनने की जिद अपने अंदर पाल लिया और अपने पापा के दोस्त एयरफोर्स में कार्यरत मढ़ौरा के चंदना निवासी अली हसन के सहयोग से 2020 में भुवनेश्वर फ्लाइंग क्लब में दाखिला ले लिया। यहां इन्होंने  करीब 80 घंटे का फ्लाइंग अनुभव प्राप्त करने के बाद एक प्रशिक्षु पायलट की मौत से सहमी ताइबा ने अपना प्रशिक्षण ब्रेक किया लेकिन चेन्नई के रहने वाले एक रिटायर डीजीपी अनुप जायसवाल की मदद से इन्होंने पुनः 2023 में इंदौर फ्लाइंग क्लब में दाखिला लेकर प्रशिक्षण आरंभ किया और वहां बच्चे हुए 120 घंटे का प्रशिक्षण प्राप्त किया। जिसके बाद डीडीसीए ने इन्हें कमर्शियल पायलट का लाइसेंस दिया। मढ़ौरा की ताईबा सारण जिले की दूसरी और मढ़ौरा की पहली महिला पायलट बन गई है। इससे पहले सारण के भेल्दी निवासी नूपुर कुमारी सारण की पहली महिला पायलट बनी थी।


ताईबा अफरोज ने बताया कि उन्हें पायलट बनने में उनके पिता के दोस्त मढ़ौरा के चंदना निवासी एयरफोर्स में कार्यरत अली हसन और ताईबा के खुद की दोस्त के पिता चेन्नई के रहने वाले पूर्व डीजीपी अनूप जायसवाल ने काफी सहयोग किया और उन्हें इस काम के लिए लगातार प्रोत्साहित भी करते रहे। जिस कारण वे माता-पिता के अलावा उक्त दोनों लोगों को पायलट बनाने का श्रेय देती है। इस दौरान पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण ताईबा ने फ्लाइंग क्लब का भारी भरकम फी चुकाने के लिए सहयोगी के अलावा मढ़ौरा बैंक ऑफ इंडिया से लोन भी लिया और अपनी एक प्रॉपर्टी को बेच दिया। 


ताईबा अफरोज ने कहा कि पर्दा प्रथा से सब कुछ नहीं हासिल हो सकता है और कपड़े से पहचान बनाने की बजाय लड़कियों को अपने मेधा से पहचान बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एविएशन के क्षेत्र में आने के लिए खासकर लड़कियों को काफी हौसला रखना पड़ेगा और तब जाकर इस क्षेत्र में उन्हें सफलता मिलेगी। उन्होंने मुस्लिम लड़कियों से भी किसी के दबाव में आए बिना अपने भविष्य निर्माण का फैसला खुद करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि लड़कियां अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए ढकोसला बाजी से दूर रहते हुए अपने हुनर व प्रतिभा के पंखों से उड़ान भरकर मनचाहा मंजिल प्राप्त कर सकती है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता