BIHAR NEWS : बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब राज्य का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद संभालने जा रहा है। अब तक जब-जब एनडीए गठबंधन की सरकार बनी, तब-तब मुख्यमंत्री की कुर्सी नीतीश कुमार के पास ही रही।
सम्राट चौधरी 15 अप्रैल, बुधवार को बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। उनके नाम की घोषणा के साथ ही प्रदेश की सियासत में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। बीजेपी के अंदर लंबे समय से उन्हें एक मजबूत ओबीसी चेहरे और संगठनात्मक नेता के तौर पर देखा जाता रहा है। अब उन्हें राज्य की कमान सौंपना पार्टी की बड़ी रणनीतिक चाल के रूप में भी देखा जा रहा है। आइए जानते हैं कि सीएम बनने के बाद सम्राट की सेलरी कितनी होगी ?
57 वर्षीय सम्राट चौधरी का जन्म मुंगेर जिले में हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत क्षेत्रीय राजनीति से की और धीरे-धीरे राज्य स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। वे पहले भी बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ के कारण पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी को प्रतिमाह लगभग 2 लाख 15 हजार रुपये वेतन के रूप में मिलेंगे। हालांकि देश के अलग-अलग राज्यों में मुख्यमंत्रियों का वेतन अलग-अलग होता है। बिहार में यह राशि वेतन और भत्तों को मिलाकर तय की गई है। लेकिन यह केवल सैलरी तक सीमित नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री पद के साथ कई महत्वपूर्ण सुविधाएं भी जुड़ी होती हैं।
उन्हें एक बड़ा सरकारी आवास, उच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, सरकारी वाहन, मुफ्त यात्रा की सुविधा, चिकित्सा सुविधाएं और निजी स्टाफ जैसी कई सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा सचिवीय सहायता, कार्यालय संचालन के लिए अलग बजट और अन्य प्रशासनिक संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे राज्य के शासन को प्रभावी तरीके से चला सकें।
अगर उनकी आर्थिक स्थिति की बात करें तो 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए शपथ पत्र के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग 11.34 करोड़ रुपये है। खास बात यह है कि उनके ऊपर किसी भी तरह का कर्ज नहीं है। इसके अलावा उनकी पत्नी के नाम पर करीब 28 लाख रुपये की संपत्ति दर्ज है। सम्राट चौधरी के पास निजी संपत्तियों के साथ-साथ परिवार के नाम पर भी कई अचल संपत्तियां मौजूद हैं, जो उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार में बीजेपी की स्वतंत्र पहचान को मजबूत करेगा। अब तक पार्टी गठबंधन की राजनीति में सहयोगी की भूमिका में दिखती थी, लेकिन इस फैसले से यह साफ संकेत मिला है कि बीजेपी अब राज्य में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यह बदलाव आने वाले समय में बिहार की राजनीति के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सम्राट चौधरी का चयन किया गया है। पार्टी को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बेहतर तालमेल देखने को मिलेगा।
अब सबकी निगाहें 15 अप्रैल को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं। इसके साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि सम्राट चौधरी अपनी नई जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं और बिहार के विकास को किस दिशा में ले जाते हैं।






