पटना/सहरसा : सूचना का अधिकार अधिनियम यानी RTI के तहत मांगी गई सूचना से जुड़े मामले में सहरसा नगर निगम के वर्तमान नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। राज्य सूचना आयोग, बिहार की ओर से RTI अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े अलग-अलग मामलों में 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। दोनों मामलों को मिलाकर नगर आयुक्त पर कुल 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
अब इस मामले में नगर विकास एवं आवास विभाग ने भी कार्रवाई की पहल की है। विभाग की ओर से 9 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में राज्य सूचना आयोग के आदेश का हवाला देते हुए नगर आयुक्त के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। विभागीय पत्र सामने आने के बाद यह मामला प्रशासनिक महकमे में चर्चा का विषय बन गया है।
दरअसल, मामला राज्य सूचना आयोग में दर्ज वाद संख्या-A8219/2024 से जुड़ा है। यह मामला चंदन सिंह बनाम प्रथम अपीलीय प्राधिकार-सह-नगर आयुक्त, नगर निगम सहरसा/लोक सूचना पदाधिकारी, नगर निगम सहरसा के बीच था। इस मामले की सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयोग ने 24 अगस्त 2026 को आदेश पारित किया। आयोग के आदेश में RTI अधिनियम की धारा 20(1) के तहत 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। विभागीय पत्र में कहा गया है कि वर्तमान नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा पर RTI Act, 2005 के उल्लंघन को लेकर दो अलग-अलग मामलों में 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसी आधार पर नगर विकास एवं आवास विभाग से उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की पहल करने को कहा गया है।
RTI कानून के तहत सरकारी विभागों और सार्वजनिक प्राधिकरणों में तैनात लोक सूचना पदाधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि वह निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा के भीतर आवेदक को मांगी गई सूचना उपलब्ध कराए। सूचना देने में अनावश्यक देरी, सूचना से इनकार या कानून के प्रावधानों का पालन नहीं करने की स्थिति में मामला सूचना आयोग तक पहुंच सकता है। RTI Act की धारा 20(1) में ऐसे मामलों में लोक सूचना पदाधिकारी पर अर्थदंड लगाने का प्रावधान है। आयोग की ओर से कार्रवाई तब की जा सकती है, जब अधिकारी बिना उचित कारण सूचना देने से इनकार करे, निर्धारित समय के भीतर सूचना उपलब्ध न कराए या गलत, अधूरी अथवा भ्रामक सूचना देने जैसी स्थिति सामने आए।
सहरसा नगर निगम से जुड़े इस मामले में आयोग के आदेश के बाद अब विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की तैयारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यानी मामला सिर्फ आर्थिक दंड तक सीमित नहीं है, बल्कि संबंधित अधिकारी की प्रशासनिक जवाबदेही भी तय किए जाने की दिशा में कदम बढ़ा है। नगर विकास एवं आवास विभाग के लोक सूचना पदाधिकारी की ओर से जारी पत्र में संबंधित शाखा से इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि RTI आवेदक चंदन सिंह को भी भेजी गई है। विभागीय दस्तावेज में राज्य सूचना आयोग के आदेश और लगाए गए अर्थदंड का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि एक नहीं, बल्कि दो मामलों में 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने की बात विभागीय पत्र में कही गई है। इससे कुल अर्थदंड की राशि 50 हजार रुपये हो जाती है। इसके साथ ही विभागीय कार्रवाई की मांग ने मामले को और गंभीर बना दिया है।फिलहाल विभागीय कार्रवाई की अंतिम प्रकृति क्या होगी, यह संबंधित सक्षम प्राधिकारी के स्तर पर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा। लेकिन राज्य सूचना आयोग के आदेश और नगर विकास एवं आवास विभाग के पत्र के सामने आने के बाद सहरसा नगर निगम में RTI से जुड़ी जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर सामने आ गया है। 50 हजार रुपये के कुल अर्थदंड और विभागीय कार्रवाई की मांग ने नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा से जुड़े इस RTI मामले को खासा महत्वपूर्ण बना दिया है।





