World Biggest Shivling: विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना, पीठ पूजा में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब; शांभवी चौधरी और सायण कुणाल बने यजमान

World Biggest Shivling: पूर्वी चंपारण के विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे बड़े सहस्रलिंगम की स्थापना हेतु पीठ पूजा शुरू हो गई है. पीठ पूजा में शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ गया है.

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Sat, 17 Jan 2026 12:35:26 PM IST

World Biggest Shivling

सहस्रलिंगम की स्थापना - फ़ोटो Reporter

World Biggest Shivling: पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत कैथोलिया स्थित जानकी नगर में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग सहस्रलिंगम की स्थापना को लेकर शनिवार से पीठ पूजा उत्साहपूर्वक प्रारंभ हो गई। इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल व्याप्त है।


पीठ पूजा में समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी और उनके पति सायण कुणाल यजमान के रूप में शामिल हुए हैं। सायण कुणाल महावीर मंदिर न्यास, पटना के सचिव भी हैं। महादेव की नगरी काशी सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वान आचार्य विधिवत रूप से पूजा-अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं।


पूरे मंदिर परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बड़ी संख्या में शिवभक्त राम-जानकी पथ पर पैदल चलते हुए मंदिर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु शिव मंत्रों का जाप कर रहे हैं, वहीं महिलाएं महादेव के मंगल गीत गाकर वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना रही हैं। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया है।


बता दें कि 30 जून 2023 को विराट रामायण मंदिर के निर्माण के लिए धार्मिक न्यास परिषद, पटना के तत्कालीन अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल के नेतृत्व में शिलापूजन किया गया था। इसके बाद लगभग डेढ़ वर्षों तक प्रतिदिन करीब 250 मजदूरों ने लगातार कार्य करते हुए जमीन के भीतर 100 फीट गहराई तक कुल 3102 स्तंभ खड़े किए। नींव कार्य पूर्ण होने के बाद मंदिर परिसर में आधारपीठ का निर्माण किया गया।


अब उसी आधारपीठ पर तमिलनाडु के महाबलीपुरम में निर्मित 33 फीट ऊंचे और 33 फीट मोटे भव्य सहस्रलिंगम की स्थापना की जा रही है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा सहस्रलिंगम बताया जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।