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Bihar News: बिहार में बदहाली की तस्वीर देखिए, एक अदद पुल के लिए तरस रहे दर्जनों गांव के हजारों लोग; चचरी पुल के सहारे कट रही जिंदगी

MOTIHARI: बिहार में सरकारें बदली लेकिन अब भी राज्य के कई ऐसे इलाके हैं जिनकी तस्वीर नहीं बदल सकी है। राज्य में अब भी कैसे इलाके हैं, जहां विकास की किरण दूर-दूर तक देखने को नहीं मिल

Bihar News: बिहार में बदहाली की तस्वीर देखिए, एक अदद पुल के लिए तरस रहे दर्जनों गांव के हजारों लोग; चचरी पुल के सहारे कट रही जिंदगी
Mukesh Srivastava
2 मिनट

MOTIHARI: बिहार में सरकारें बदली लेकिन अब भी राज्य के कई ऐसे इलाके हैं जिनकी तस्वीर नहीं बदल सकी है। राज्य में अब भी कैसे इलाके हैं, जहां विकास की किरण दूर-दूर तक देखने को नहीं मिलता है। इन इलाकों के लोग अब भी बाबा आदम के युग में जी रहे हैं। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है जो बिहार के विकास की कहानी बयां कर रही है।


दरअसल, सुगौली के माली पंचायत स्थित सिकरहना नदी के आस-पास के दर्जनों गांव के हजारों लोगों की जिंदगी चचरी पुल के सहारे चल रही है। प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर हजारों लोग इस चचरी पुल से गुजरते हैं। मठ समिति के द्वारा चचरी पुल बनाकर आस-पास के लोगों को सुविधा दी जाती है लेकिन साथ ही इस पुल से गुजरने वाले लोगों से लाखों रुपए की वसूली भी की जाती है।


चचरी पुल से आने-जाने वाले लोगों से जो पैसे वसूले जाते हैं वह मठ को जाता है। यह पुल दर्जनों गांवों को मुख्यालय से जोड़ती है। बरसात में नदी का पानी बढ़ने के बाद चचरी पुल टूटकर धराशाई हो जाता है। चचरी पुल के ध्वस्त होने के बाद लोग किसी तरह से लंबी दूरी तय कर मुख्यालय पहुंच पाते हैं। इस रास्ते से मोटरसाइकिल, साइकिल सहित पैदल लोग आया-जाया करते हैं‌।


पुल पार करते समय कभी-कभी अनबैलेंस होकर लोग बाइक समेत नदी में गिर जाते हैं और घायल हो जाते हैं। इस तरह की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं। बरसात में लोग रेलवे पुल का सहारा लेते हैं‌। जान जोखिम में डालकर रेल पुल पार करते हैं और कई बार ट्रेन की चपेट में भी आ जाते हैं। इस बड़ी समस्या पर को प्रशासनिक स्तर का कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नही है।

रिपोर्ट- सोहराब आलम