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Job Fraud: नौकरी का झासा देकर बेरोजगार युवाओं से फर्जी कंपनी ने की ठगी, पुलिस ने गिरोह को दबोचा

Job Fraud: बिहार से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। मार्केटिंग फील्ड में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है।

Job Fraud
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PRIYA DWIVEDI
4 मिनट

Job Fraud: बिहार से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। मार्केटिंग फील्ड में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। डीबीआर कंपनी के नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े में शामिल 11 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई शनिवार को मोतिहारी के छतौनी थाना अंतर्गत बरियारपुर मोहल्ले में की गई, जहां गिरोह के सदस्य बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षण के नाम पर इकट्ठा किए हुए थे।


दरअसल, छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 90 युवाओं को रेस्क्यू किया, जिन्हें विभिन्न राज्यों से नौकरी दिलाने के नाम पर बुलाया गया था। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड एनामुल है, जो रामगढ़वा थाना क्षेत्र के बेला गांव का निवासी है। पहले वह रक्सौल में डीबीआर कंपनी के नाम पर नेटवर्किंग चलाता था, बाद में मोतिहारी के छतौनी में 'ऑटो मिक्स आयुर्वेदिक कम्पनी' के नाम से फर्जी नेटवर्किंग शुरू कर दी।


गिरफ्तार किए गए 11 लोगों में से एक आरोपी पूर्वी चंपारण का रहने वाला है, जबकि बाकी आरोपी असम, बंगाल, झारखंड और कटिहार जैसे अन्य राज्यों से हैं। इनके नाम हैं—पताही का दीपक महतो, बंगाल का अमर, असम का अभिनोल इस्लाम, बंगाल के दिलीप बारदी और अबु सलाम, कटिहार का सउद आलम, पूर्णिया का मोहम्मद असलम, बंगाल के वाहिद जमा और सदीम शाकिब।


छतौनी थानाध्यक्ष सुनील कुमार को सूचना मिली थी कि छोटा बरियारपुर स्थित शंभू साह के मकान में एक गिरोह बेरोजगार युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे ठग रहा है। सूचना मिलते ही एसपी ने सदर डीएसपी दिलीप सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया। इसके बाद लगभग आठ घंटे तक छापेमारी और जांच की गई, जिसके बाद गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया और 90 युवाओं को मुक्त कराया गया।


पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि यह गैंग सोशल मीडिया के माध्यम से युवक-युवतियों को नौकरी का झांसा देता था। जब कोई उम्मीदवार उनके संपर्क में आता, तो उन्हें प्रशिक्षण के नाम पर 25 हजार रुपये लिए जाते। बदले में उन्हें एक किट दी जाती, जिसमें सिर्फ एक पैंट का कपड़ा, एक टाई और एक एनर्जी टैबलेट होता। फिर उन्हें उस किट को बेचने के लिए मजबूर किया जाता। इस तरह से ठगे गए युवाओं ने जब महसूस किया कि वे धोखा खा चुके हैं, तो उनमें से कुछ ने हिम्मत कर स्थानीय पुलिस से संपर्क किया।


ठगी का यह जाल इतना व्यवस्थित था कि इसमें शामिल लोगों ने अलग-अलग नामों और कंपनियों के तहत नेटवर्किंग को अंजाम दिया। रेस्क्यू किए गए सभी युवक बाहरी राज्यों से आए हुए थे, जिनके परिजनों को पुलिस ने सूचित कर दिया है। इस मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करने में जुटी हुई है।

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