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BPSC परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार के वायरल बयान पर CM सम्राट चौधरी सख्त, मामले पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के दिये निर्देश

BPSC परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार के कथित विवादित बयान का वीडियो वायरल होने पर CM सम्राट चौधरी ने संज्ञान लिया। सामान्य प्रशासन विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

बिहार न्यूज
विवादित बयान से बढ़ा छात्रों का आक्रोश
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
6 मिनट

पटना: BPSC परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन और रैंक को लेकर जारी विवाद के बीच परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार का एक कथित विवादित बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संज्ञान लेते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।


विवादित बयान से बढ़ा छात्रों का आक्रोश

दरअसल, BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार ने पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक कथित आपत्तिजनक और बेतुका बयान दिया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई।


पहले से ही परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन और रैंक को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र अब परीक्षा नियंत्रक के बयान का भी विरोध कर रहे हैं। छात्रों ने पोस्टर और पेंटिंग के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया है। साथ ही, परीक्षा नियंत्रक से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की जा रही है।


विरोध के बाद परीक्षा नियंत्रक ने मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार को छात्रों से माफी मांगनी पड़ी। हालांकि, उनके बयान को लेकर छात्रों का आक्रोश पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामान्य प्रशासन विभाग को अधिकारी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार की ओर से इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है। इस बीच BPSC परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन और रैंक से जुड़े विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन भी जारी है।


क्या है पूरा मामला?

पटना में BPSC परीक्षा की कॉपियों की जांच और रैंक को लेकर चल रहे विवाद के बीच आयोग के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार ने छात्रों के आरोपों को खारिज करते हुए आयोग का पक्ष रखा है. रैंक-3 हासिल करने वाले अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि मूल्यांकन निर्धारित नियमों के आधार पर किया गया है और अधूरे उत्तर के लिए पूरे अंक नहीं दिए जा सकते. दरअसल, BPSC परीक्षा में तीसरा रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका को लेकर छात्र संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे थे. छात्रों के एक वर्ग ने कॉपियों की जांच में गड़बड़ी और मनमाने तरीके से अंक देने का आरोप लगाया था. इसको लेकर पटना में छात्र लगातार प्रदर्शन भी कर रहे हैं.


रैंक-3 की कॉपी को लेकर परीक्षा नियंत्रक ने क्या कहा?

BPSC परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार ने बताया कि जिस उत्तर पुस्तिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसमें सातवें प्रश्न का उत्तर लिखा गया था, लेकिन उस प्रश्न के दो सब-पार्ट भी थे. अभ्यर्थी ने उन दोनों हिस्सों का उत्तर नहीं दिया था. ऐसे में मूल्यांकन के दौरान उन हिस्सों के लिए अंक नहीं दिए गए.परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट किया कि मुख्य परीक्षा में सिर्फ कॉपी के पन्ने भरने से अंक नहीं मिलते हैं. परीक्षार्थी ने सवाल का कितना सटीक, तार्किक और विश्लेषणात्मक जवाब दिया है, मूल्यांकन में इसका ध्यान रखा जाता है. यदि प्रश्न के किसी हिस्से का उत्तर नहीं दिया गया है तो उसके लिए अंक मिलना संभव नहीं है.


‘पन्नों की संख्या नहीं, जवाब की गुणवत्ता मायने रखती है’

आयोग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में उत्तर की गुणवत्ता और विषय की समझ को प्राथमिकता दी जाती है. लंबे उत्तर लिखने या अधिक पन्ने भरने से अपने आप अधिक अंक नहीं मिलते. परीक्षा नियंत्रक के मुताबिक परीक्षक यह देखते हैं कि अभ्यर्थी ने पूछे गए सवाल का कितना सटीक और विषय आधारित जवाब दिया है. रैंक-3 वाले अभ्यर्थी की कॉपी में भी इसी प्रक्रिया के तहत मूल्यांकन किया गया है.


छात्रों से कोर्ट जाने को कहा

लगातार लगाए जा रहे आरोपों पर परीक्षा नियंत्रक ने आंदोलन कर रहे छात्रों को अदालत का रास्ता अपनाने की बात कही. उन्होंने कहा कि यदि छात्रों को लगता है कि आयोग की ओर से किसी तरह की गड़बड़ी की गई है तो वे साक्ष्यों के साथ न्यायालय का रुख कर सकते हैं. राजेश कुमार ने कहा कि आरोप लगाने के बजाय यदि किसी के पास ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें उचित कानूनी मंच पर रखा जाना चाहिए. आयोग का कहना है कि परीक्षा और कॉपियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की गई है. इसी दौरान परीक्षा नियंत्रक ने छात्रों के आरोपों के संदर्भ में कहा, “हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार.” उनके इस बयान के बाद BPSC परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद और चर्चा में आ गया है.



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