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पूर्व विधायक रीतलाल यादव को पटना हाई कोर्ट से बड़ा झटका, अदालत ने जमानत याचिका खारिज की

Patna High Court News: पटना हाईकोर्ट ने दानापुर के पूर्व RJD विधायक रीतलाल यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी। खगौल थाना कांड से जुड़े मामले में कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता और उनके आपराधिक इतिहास को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया।

Patna High Court News
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Patna High Court News: पटना हाईकोर्ट ने दानापुर के पूर्व RJD विधायक रीतलाल यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी है। खगौल थाना कांड संख्या 129/2025 से जुड़े मामले में न्यायमूर्ति अशोक कुमार पांडेय की एकलपीठ ने आरोपों की गंभीरता और उनके आपराधिक इतिहास को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।



कोर्ट ने अपने 18 पन्नों के आदेश में कहा कि जमानत सामान्य नियम है और जेल अपवाद, लेकिन इस मामले में आरोपों की प्रकृति और आरोपी के आपराधिक इतिहास को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती। मामला भवन निर्माण कंपनी जेनेक्स इको इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी ने वर्ष 2023 में खगौल-दानापुर के कोठवा गांव में एक प्रोजेक्ट शुरू किया था।



आरोप के मुताबिक, रीतलाल यादव के भाई पिंकू यादव ने प्रोजेक्ट के लिए निर्माण सामग्री खरीदने का सुझाव दिया था। बाद में कथित तौर पर पिंकू यादव ने 33 लाख रुपये की मांग की, जबकि निर्माण सामग्री की कीमत करीब 19 लाख रुपये बताई गई।



इसके बाद वर्ष 2024 में रीतलाल यादव ने कंपनी के एक साझेदार को फोन कर मिलने के लिए बुलाया। आरोप है कि विधायक के घर पर 50 लाख रुपये की रंगदारी की मांग की गई। इसमें 4 लाख रुपये दिए गए और 30 लाख रुपये का एक लिखित नोट भी तैयार कर हस्ताक्षर कराया गया।



इसके बाद कथित तौर पर धमकी भरे फोन आने लगे। आरोप है कि विधायक के साले ने जबरन 10 लाख रुपये और वसूल किए। शिकायतकर्ता पक्ष ने रंगदारी मांगने से संबंधित रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया है।



रीतलाल यादव की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि वह निर्दोष हैं और उनका निर्माण सामग्री से संबंधित कोई कारोबार नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि घटना के करीब दो साल बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें मामले में फंसाया गया है।



जमानत याचिका का विरोध करते हुए राज्य के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि रीतलाल यादव के खिलाफ कुल 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े मामले भी शामिल हैं। राज्य की ओर से यह भी दलील दी गई कि कई मामलों में गवाह कथित तौर पर डर के कारण अदालत में गवाही देने नहीं पहुंचते। इससे आरोपी को लाभ मिलता है और कई मामलों में उनके बरी होने की स्थिति बनती है। राज्य ने इस मामले को संगठित अपराध से जुड़ा बताया।



दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पटना हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि मामले में लगाए गए आरोपों की गंभीरता और रीतलाल यादव के आपराधिक इतिहास को देखते हुए इस स्तर पर उन्हें जमानत देना उचित नहीं होगा।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता