PATNA:पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के पूर्व प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप (एनपी) सिंह ने सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि प्राचार्य पद से हटाए जाने और बेतिया मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरण किए जाने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है।
डॉ. एनपी सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह अनुचित बताया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ बिना कारण बताओ नोटिस (शो कॉज) जारी किए ही दंडात्मक कार्रवाई कर दी गई, जो एक वरिष्ठ चिकित्सक के साथ न्यायसंगत नहीं है।
डॉ. सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के औचक निरीक्षण से एक रात पहले उनके साथ एक दुर्घटना हुई थी। उनके अनुसार, चाय बनाते समय गर्म पानी उनके पेट पर गिर गया, जिससे वह झुलस गए थे। उन्होंने दावा किया कि इस घटना की जानकारी उनके बेटे ने वीडियो और तस्वीरों के माध्यम से विभागीय अधिकारियों, सचिव और मेडिकल सुपरिटेंडेंट को दी थी।
पूर्व प्राचार्य ने कहा कि दुर्घटना के बाद उन्होंने विभाग के कई अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी बात नहीं हो सकी। उनका आरोप है कि उनकी स्थिति को समझने के बजाय उन्हें अनुपस्थित मान लिया गया और बिना स्पष्टीकरण मांगे ही कार्रवाई कर दी गई।
डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि वह वर्ष 1988 से पीएमसीएच से जुड़े रहे हैं और अपने पूरे कार्यकाल में उन्होंने संस्थान की गरिमा को बनाए रखने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ चिकित्सक के खिलाफ बिना पक्ष सुने कार्रवाई करना विभाग के तानाशाही रवैये को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस तरह के माहौल में काम जारी नहीं रखना चाहते, इसलिए उन्होंने सरकारी सेवा से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।
पीएमसीएच के पूर्व प्रिसिंपल ने बताया कि घोर अपमान मर्यादा का हनन और अस्पष्ट कार्रवाई बिना स्पष्टीकरण के मांगे कार्रवाई की गयी। बेहोश आदमी कैसे फोन उठाएगा। झूठे बोले तब ना यहां झूठ बोलवे नहीं किया कउटा काट लिया। ई कोई बात हो गया, तमाशा है। जिस दिन स्वास्थ्य मंत्री का औचक निरीक्षण था उसके पूर्व रात्रि में गर्म पानी पेट पर गिर गया। चाय बना रहे थे गर्म पानी गिर गया। हम जहां रहते हैं वहां निजी क्लिनिक है तो कौन गुनाह है। हम अंदर क्या कर रहे थे प्रैक्टिस कर रहे थे कि सुत के रो रहे थे कि या हमको दर्द हो रहा था। चलिये खत्म कीजिए इंटरव्यू।
उन्होंने कहा कि हम इतना बड़ा आदमी नहीं है, हम बहुत छोटा आदमी है एक टीचर हैं. मन तो कर रहा है कि आत्महत्या कर लें मनोचिकित्सक हैं हम अवसादग्रस्त है। जीने का मन नहीं कर रहा है। इतना दुख हमें मिल रहा है।लोगों का दुख निवारण करते थे हम। हम जैसे आदमी का रहना ठीक नहीं। इस्तीफा दो सेवानिवृति लो पैसा लो घर जाओ अपना काम करों आराम से पब्लिक की सेवा करो। अच्छा काम करो। हमने क्या गड़बड़ी किया कि बेतिया जाए। 1988 से पीएमसीएच में हूं। गरिमाय मेरा जीवन रहा है। कल प्रिसिंपल था आज नहीं हूं। जो पत्र मुझे मिला है, बिना किसी स्पष्टीकरण पूछे एक वरीय चिकित्सक को दंडात्मक कार्रवाई करने का एक तानाशाही रवैया स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री ने अपनाया है।
कुछ तत्व मिलकर जुलकर कैमराबाजी करेंगे। साक्ष्य देंगे अवसरवाद करने से भागेंगे। सौ फोन करने पर भी नहीं उठाएंगे। सचिव और विशेष सचिव, ओएसडी, चपरासी तक फोन पर निशांत कुमार से बात नहीं कराएंगे। निशांत के पीएस कौशलेन्द्र जी को सौ बार से ज्यादा बार फोन किया। जिस दिन मंत्री निशांत कुमार का निरीक्षण हुआ उस दिन से पहले तक मैं बिल्कुल ठीक था। मैंने काम किया। सचिव से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बात की। उन्होंने बताया कि उस रात मैं जल गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया. वाट्सएप पर मेरे बेटे ने वीडियो बनाकर जला हुआ निशान सेक्रेटरी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट को भेजा लेकिन सारे लोगों ने कहा कि हम गायब है। क्या हम कोई अपराधी है।
यदि हमारे अभिभावक हैं तो इतना तो देखना चाहिए था हमारे साथ क्या हुआ। लेकिन किसी ने हमारी सुध नहीं ली। जिस घर में हम पैदा हुए हैं उस घर में क्या हम सरकारी गाड़ी नहीं लगाएंगे। रात में दुर्घटना हुई तो हम सूचना पहले देंगे कि इलाज कराएंगे। बिना स्पष्टीकरण के पीएमसीएच के प्राचार्य को हटाना कही से उचित नहीं है। मैंने कौन का कर्तव्यहीनता वाला काम किया है। कौन सी सरकारी गाड़ी अफसर के निजी घर पर नहीं लगती है। यह कोई बताये। मैंने सुपरिटेंडेंट प्रिसिंपल सेक्रेटरी सबको फोन लगाया और वाट्सएप पर घायल होने का फोटो भेजा। मैं इस घृणा से भरे षडयंत्रकारी माहौल में काम नहीं करूंगा।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्री के औचक निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित पाए जाने के बाद डॉ. एनपी सिंह को पीएमसीएच के प्राचार्य पद से हटाकर बेतिया मेडिकल कॉलेज स्थानांतरित किया गया था। इस कार्रवाई के बाद से मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।





