Bihar Education : शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति को गति देने के लिए केंद्र सरकार की पीएम ई-विद्या (PM e-Vidya) पहल अब बिहार के सरकारी स्कूलों तक तेजी से पहुंचाई जा रही है। बदलते समय में ऑनलाइन शिक्षा की बढ़ती जरूरत को देखते हुए शिक्षा विभाग इस प्लेटफॉर्म को छात्रों और शिक्षकों के बीच लोकप्रिय बनाने में जुट गया है। इसका उद्देश्य है कि हर विद्यार्थी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के घर बैठे गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई कर सके और महंगी कोचिंग पर उसकी निर्भरता कम हो।
इसी दिशा में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), पटना में 27 से 31 जुलाई तक पांच दिवसीय राज्यस्तरीय अभिविन्यास-सह-प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में बिहार के अलग-अलग जिलों से आए शिक्षकों को डिजिटल कंटेंट तैयार करने और पीएम ई-विद्या प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग की विस्तृत जानकारी दी गई।
बिहार के 56 शिक्षकों ने लिया प्रशिक्षण
राज्यस्तरीय कार्यशाला में बिहार के विभिन्न जिलों से कुल 56 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। भागलपुर जिले का प्रतिनिधित्व इंटर हाई स्कूल की डॉ. शैल प्रज्ञा, मध्य विद्यालय दोगच्छी के ओम प्रकाश तथा मध्य विद्यालय तेतरहाट की इफत इमरान ने किया।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाले समय में डिजिटल शिक्षा पारंपरिक कक्षाओं का विकल्प नहीं होगी, बल्कि पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने वाली एक मजबूत सहयोगी प्रणाली के रूप में काम करेगी। शिक्षकों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार किया गया।
पीएम ई-विद्या ऐप पर मिल रही मुफ्त पढ़ाई
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि PM e-Vidya मोबाइल ऐप पूरी तरह निःशुल्क है। इस ऐप का उपयोग करने के लिए किसी प्रकार का सदस्यता शुल्क या भुगतान नहीं करना पड़ता। इस प्लेटफॉर्म पर छात्र अपनी कक्षा और विषय के अनुसार वीडियो लेक्चर, अध्ययन सामग्री, अभ्यास प्रश्न और पुनरावृत्ति से जुड़ी सामग्री कभी भी देख सकते हैं। इससे स्कूल में पढ़ाए गए कठिन विषयों को दोबारा समझना आसान होगा और परीक्षा की तैयारी भी बेहतर ढंग से की जा सकेगी।
बिहार के लिए अलग डिजिटल चैनल
शिक्षकों को जानकारी दी गई कि पीएम ई-विद्या प्लेटफॉर्म पर BR-63 से BR-67 तक बिहार राज्य के लिए समर्पित डिजिटल चैनल उपलब्ध हैं। इन चैनलों पर बिहार के पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार की गई सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा यदि कोई विद्यार्थी चाहे तो देश के अन्य राज्यों के शिक्षकों द्वारा संचालित ऑनलाइन कक्षाओं का भी लाभ उठा सकता है। इससे छात्रों को अलग-अलग शिक्षण शैली का अनुभव मिलेगा और उनकी समझ और मजबूत होगी।
ग्रामीण छात्रों के लिए होगा सबसे ज्यादा लाभ
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल का सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को मिलेगा। अक्सर ऐसे छात्र महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते हैं। अब वे स्कूल से लौटने के बाद मोबाइल के माध्यम से कठिन अध्यायों की दोबारा पढ़ाई कर सकेंगे। इससे उनकी पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और प्रतियोगी परीक्षाओं सहित वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी भी मजबूत होगी।
शिक्षकों को सिखाई गई डिजिटल कंटेंट बनाने की तकनीक
पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल ऐप के उपयोग तक सीमित नहीं रहा। इसमें शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रतिभागियों से स्वयं शैक्षणिक वीडियो तैयार कराए गए और उनका तकनीकी व शैक्षणिक मूल्यांकन किया गया। विशेषज्ञों ने विषय की शुद्धता, सरल भाषा, प्रभावी प्रस्तुतीकरण, स्पष्ट ध्वनि, उचित प्रकाश व्यवस्था, कैमरा एंगल और बच्चों की समझ के अनुरूप कंटेंट तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। इसका उद्देश्य यह है कि भविष्य में सरकारी विद्यालयों के शिक्षक स्वयं गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री तैयार कर सकें और छात्रों तक बेहतर तरीके से पहुंचा सकें।
हर स्कूल में चलेगा जागरूकता अभियान
प्रशिक्षण के समापन पर सभी शिक्षकों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों और अभिभावकों को पीएम ई-विद्या ऐप के बारे में जागरूक करें। शिक्षकों से कहा गया कि अधिक से अधिक बच्चों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि डिजिटल शिक्षा का लाभ हर विद्यार्थी तक पहुंच सके। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे पढ़ाई अधिक सुलभ, रोचक और प्रभावी बनेगी तथा सरकारी स्कूलों में भी डिजिटल शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ेगा।
डिजिटल शिक्षा की ओर बड़ा कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षा का समन्वय ही नई शिक्षा व्यवस्था की पहचान बनेगा। पीएम ई-विद्या जैसे प्लेटफॉर्म छात्रों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ शिक्षकों को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ रहे हैं। यदि विद्यालय स्तर पर इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो बिहार के लाखों छात्रों को बिना अतिरिक्त खर्च के बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।





