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बंगाल में नई सरकार से बिहार को होंगे बड़े लाभ, सीमा सुरक्षा से लेकर विकास परियोजनाओं तक असर की उम्मीद

Bihar News: पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद बिहार को सीमा सुरक्षा, घुसपैठ नियंत्रण, सड़क परियोजनाओं और जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर बड़ा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे दोनों राज्यों के बीच विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
© AI
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार बनने से इसका सीधा और सकारात्मक असर पड़ोसी राज्य बिहार पर देखने को मिल सकता है। हाल में हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों को केवल राजनीतिक जीत ही नहीं, बल्कि बिहार के दीर्घकालिक हितों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बिहार में पहले से एनडीए की सरकार है और अब बंगाल में भी समान विचारधारा वाली सरकार बनने से दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दों पर सहमति बनने की संभावना बढ़ गई है। इसका सबसे अधिक लाभ बिहार के सीमावर्ती जिलों को मिल सकता है।


सीमा सुरक्षा-घुसपैठ पर सहयोग की उम्मीद

अब तक बंगाल में ममता सरकार के दौरान घुसपैठ के मुद्दे पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा था, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में यह समस्या गंभीर बनी हुई थी। लेकिन अब केंद्र, बिहार और बंगाल में समान राजनीतिक सोच वाली सरकार होने से घुसपैठियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। इससे न केवल अवैध घुसपैठ पर रोक लगेगी, बल्कि सीमा पार होने वाली तस्करी पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है।


सिक्स लेन हाईवे परियोजना को रफ्तार

वाराणसी से बिहार और झारखंड होते हुए कोलकाता तक बनने वाले महत्वाकांक्षी सिक्स लेन राष्ट्रीय राजमार्ग को भी नई गति मिलने की संभावना है। बताया जा रहा है कि बंगाल में पिछली सरकार के दौरान इस परियोजना के लगभग 285 किलोमीटर हिस्से पर काम धीमा पड़ा हुआ था, जबकि अन्य राज्यों में प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी। नई सरकार के बनने से अब इस बाधा के दूर होने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में बिहार से कोलकाता का सफर लगभग 7 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।



जल परियोजनाओं और सिंचाई पर भी असर

इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ जल बंटवारे के मामलों में भी बिहार को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। 1978 के समझौते के तहत अपर महानंदा सिंचाई परियोजना से जुड़ी 8 किलोमीटर लंबी नहर का कार्य अब तेज हो सकता है, जिससे लगभग 67 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी।


इसके अलावा 1996 के फरक्का बराज समझौते के तहत बांग्लादेश को पानी दिए जाने की व्यवस्था पर भी पुनर्विचार की मांग लंबे समय से उठती रही है। अब नई राजनीतिक स्थिति में इस दिशा में सकारात्मक पहल की उम्मीद की जा रही है, जिससे गंगा जल में बिहार की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता

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