Bihar News : ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर रेलवे ने अब निगरानी व्यवस्था और सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। खाने की गुणवत्ता में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए रेलवे बोर्ड ने कैटरिंग सेंटर, बेस किचन, कैंटीन और जन आहार केंद्रों की निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत कैमरों की मदद से रसोई और भोजन तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी।
पूर्व मध्य रेल के प्रमुख स्टेशनों और महत्वपूर्ण ट्रेनों में भी इस व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा रहा है। पटना जंक्शन, दानापुर, पाटलिपुत्र और राजेंद्रनगर टर्मिनल जैसे प्रमुख स्टेशनों के साथ-साथ महत्वपूर्ण ट्रेनों की पेंट्री कार में भोजन की तैयारी और साफ-सफाई की निगरानी की जाएगी। संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
रसोई से स्टोरेज तक कैमरे की नजर
नई व्यवस्था में सिर्फ खाना पकाने वाले स्थान की निगरानी ही नहीं होगी, बल्कि कच्चे माल के स्टोरेज एरिया पर भी नजर रखी जाएगी। बेस किचन में हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिससे यह देखा जा सके कि खाद्य सामग्री किस स्थिति में रखी जा रही है और खाना तैयार करते समय स्वच्छता के मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
रेलवे का उद्देश्य है कि यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता में किसी तरह का समझौता न हो। कैमरों के जरिए अधिकारियों को रसोई की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती रहेगी। इससे निरीक्षण व्यवस्था को भी अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
AI बताएगा किचन में गड़बड़ी
रेलवे की नई निगरानी व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके जरिए किचन में चूहे, कॉकरोच या अन्य कीड़े-मकोड़े दिखाई देने पर सिस्टम अलर्ट जारी कर सकेगा। इस तकनीक का उद्देश्य केवल निगरानी करना नहीं, बल्कि समस्या सामने आते ही संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाना है। इससे किचन में स्वच्छता से जुड़ी कमियों को लंबे समय तक नजरअंदाज किए जाने की संभावना कम होगी।
रोटी और पराठे की गुणवत्ता पर भी फोकस
रेलवे बोर्ड ने रोटी और पराठा तैयार करने की प्रक्रिया की भी विशेष समीक्षा के निर्देश दिए हैं। भोजन की गुणवत्ता में एकरूपता बनाए रखने के लिए यह देखा जाएगा कि रोटी और पराठे निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार किए जा रहे हैं या नहीं।
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई आईआरसीटीसी वॉर रूम की समीक्षा बैठक में कैटरिंग व्यवस्था की निगरानी और सुधार पर जोर दिया गया। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि जहां भी लापरवाही सामने आएगी, वहां संबंधित एजेंसी के खिलाफ नोटिस के साथ सुधारात्मक और जरूरत पड़ने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
दक्षिण मध्य रेलवे के अनंतपुर स्थित एक किचन की वीडियो निगरानी के दौरान सामने आई स्थिति के बाद भी सुधार के निर्देश दिए गए। इससे साफ है कि रेलवे अब केवल कागजी निरीक्षण के बजाय रियल-टाइम निगरानी पर ज्यादा जोर दे रहा है।
रेल मदद पर शिकायत का होगा त्वरित समाधान
यात्रियों की शिकायतों को भी इस पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। अगर किसी यात्री को ट्रेन या स्टेशन पर खराब, बासी या अस्वच्छ भोजन मिलता है तो वह रेल मदद पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज करा सकता है। यात्री शिकायत के साथ फोटो भी साझा कर सकेंगे।
शिकायतों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग किए जाने से रेलवे को समस्या वाले स्थान की पहचान करने और संबंधित एजेंसी तक शिकायत पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे यात्रियों की शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को पहले की तुलना में तेज बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
लापरवाह एजेंसियों पर होगी कार्रवाई
रेलवे ने कैटरिंग व्यवस्था की निगरानी करने वाली थर्ड-पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसियों की जवाबदेही भी तय करने का फैसला किया है। लगातार खराब प्रदर्शन करने वाली एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट तक किया जा सकता है। निरीक्षण एजेंसियों को किचन में मिली कमियों और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड रखना होगा। यानी अब सिर्फ निरीक्षण कर रिपोर्ट देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि यह भी दर्ज करना होगा कि कमी मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई और उसमें कितना सुधार हुआ।
रेलवे की इस नई व्यवस्था का सीधा असर यात्रियों की यात्रा के दौरान मिलने वाले भोजन पर पड़ने की उम्मीद है। CCTV, AI आधारित अलर्ट, डिजिटल शिकायत व्यवस्था और एजेंसियों की जवाबदेही के जरिए रेलवे कैटरिंग को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले समय में इन व्यवस्थाओं की निगरानी और विस्तार के साथ यात्रियों को भोजन की गुणवत्ता में और सुधार देखने को मिल सकता है।




