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सुशासन की सरकार का हाल: सुप्रीम कोर्ट ने जमकर फटकार लगायी, कहा- बिहार के अधिकारियों ने दुःसाहस किया है, उनसे जुर्माना वसूला जाये

PATNA : सुप्रीम कोर्ट ने आज बिहार सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि बिहार सरकार औऱ उसके अधिकारियों ने दुःसाहस किया है. बिहार के अधिकारियों की इस दुःसाहस पर कोर्ट ने कड़ी ना

सुशासन की सरकार का हाल: सुप्रीम कोर्ट ने जमकर फटकार लगायी, कहा- बिहार के अधिकारियों ने दुःसाहस किया है, उनसे जुर्माना वसूला जाये
First Bihar
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PATNA : सुप्रीम कोर्ट ने आज बिहार सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि बिहार सरकार औऱ उसके अधिकारियों ने दुःसाहस किया है. बिहार के अधिकारियों की इस दुःसाहस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बिहार सरकार पर 20 हजार का जुर्माना भी लगा दिया. कोर्ट ने कहा कि बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट का समय बर्बाद करने की दोषी है.


पहले सरकार ने किया समझौता औऱ फिर पहुंची कोर्ट
दरअसल बिहार सरकार एक कर्मचारी की बर्खास्तगी के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. दिलचस्प बात ये है कि सरकार ने पटना हाईकोर्ट में इसी मामले में दायर याचिका में आपसी समझौता कर दिया था. बर्खास्त कर्मचारी औऱ सरकार के बीच आपसी समझौता होने के बाद पटना हाईकोर्ट ने इस मामले को निपटा दिया था. लेकिन बाद में बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी. 


सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एसके कौल और आरएस रेड्डी की खंडपीठ ने कहा कि हम बिहार सरकार की अपील को अदालती प्रक्रिया का पूरी तरह दुरुपयोग मानते हैं. यह गंभीर है क्योंकि एक राज्य सरकार ने ऐसा किया है. यह अदालत के समय की भी बर्बादी है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि बिहार सरकार की याचिका पर 20 हजार रुपये का जुर्माना करते हैं,. जुर्माने की राशि को चार हफ्ते के अंदर सुप्रीम कोर्ट के ग्रुप सी कर्मचारी कल्याण संगठन के पास जमा करा दिया जाना चाहिये. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार यह जुर्माना उन अधिकारियों से वसूले, जो इस 'दु:साहस' के लिए जिम्मेदार हैं.


क्या है मामला
दरअसल मामला एक सरकारी कर्मचारी की बर्खास्तगी से संबंधित है. बिहार सरकार ने अपने एक कर्मचारी को जून 2016 में सेवा से बर्खास्त कर दिया था.  कर्मचारी के खिलाफ कथित तौर पर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई थी. सरकार ने  उन्हें निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की थी. इसमें उनमें बर्खास्त करने का फैसला लिया गया. अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ कर्मचारी ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. पटना हाई कोर्ट की एकल पीठ ने सरकार के जून 2016 के बर्खास्तगी के आदेश को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने सरकार कीजांच रिपोर्ट भी खारिज कर दी थी.


हाईकोर्ट की एकलपीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने पटना हाई कोर्ट के डबल बेंच में अपील दायर किया था. डबल बेंच में कुछ समय तक सुनवाई के बाद दोनों पक्षों के वकीलों ने संयुक्त रूप से आग्रह किया कि सहमति के आधार पर अपील का निपटारा किया जाए. पटना हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की सहमति के मुताबिक इस मामले का निपटारा कर दिया था. 


लेकिन बिहार सरकार ने हाईकोर्ट में समझौता करने के बाद  उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश के खिलाफ पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि मामले पर कुछ समय सुनवाई के बाद राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए वकील ने संयुक्त रूप से आग्रह किया कि अपील का सहमति के आधार पर निपटारा किया जाए. पीठ ने कहा कि इसके बाद सहमति के आधार पर निपटारा कर दिया गया. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने का क्या मतलब है.

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