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Bihar News : Big Breaking: IAS संजीव हंस फरार...टेंडर माफिया रिशुश्री मामले में 3 अफसरों को SVU ने किया गिरफ्तार

बिहार के चर्चित रिशु श्री केस में SVU ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं पूर्व IAS संजीव हंस का अब तक कोई पता नहीं चल सका है। जानिए क्या है पूरा मामला और जांच में आगे क्या हो सकता है।

Bihar News : Big Breaking: IAS संजीव हंस फरार...टेंडर माफिया रिशुश्री मामले में 3 अफसरों को SVU ने किया गिरफ्तार
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar News : बिहार के चर्चित रिशु श्री भ्रष्टाचार और कथित टेंडर घोटाला मामले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपित अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। एसवीयू कांड संख्या 05/25 में हुई इस कार्रवाई के दौरान मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया। वहीं मामले के एक अन्य प्रमुख आरोपित आईएएस अधिकारी संजीव हंस का पता नहीं चल सका। सूत्रों के अनुसार वे फिलहाल राज्य से बाहर बताए जा रहे हैं।


जांच एजेंसियों के मुताबिक रिशु श्री मामले में भ्रष्टाचार, सरकारी ठेकों में अनियमितता, अवैध भुगतान और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच लंबे समय से चल रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट और छापेमारी में सामने आए तथ्यों के आधार पर एसवीयू ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच तेज की थी। इसी जांच के क्रम में कई अधिकारियों और इंजीनियरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी।


बताया जाता है कि वित्त विभाग में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी रहे मुमुक्षु चौधरी पर नगर निकायों में पदस्थापन के दौरान रिशु श्री से जुड़ी कंपनियों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने और ठेकों में अनियमितता बरतने के आरोप हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि उनके ठिकानों पर हुई पूर्व की छापेमारी में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी, जिसके बाद से वे एजेंसियों के रडार पर थे।


वहीं भवन निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास भी इस मामले में प्रमुख आरोपितों में शामिल हैं। ईडी की छापेमारी के दौरान उनके आवास से करोड़ों रुपये नकद मिलने का दावा किया गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सरकारी निर्माण कार्यों और टेंडरों में प्रभाव का इस्तेमाल कर कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया।


नगर विकास एवं आवास विभाग के कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह पर भी रिशु श्री समूह से जुड़े ठेकेदारों से कथित रूप से रिश्वत लेने और बिल भुगतान में अनियमितता करने के आरोप हैं। ईडी और एसवीयू की जांच में उनके नाम का उल्लेख सामने आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई थी।


सूत्रों के अनुसार बुधवार को एसवीयू की टीम ने तीनों आरोपितों को पूछताछ के लिए बुलाया था। लंबी पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद सभी को न्यायालय में पेश किए जाने की तैयारी की जा रही है। एजेंसी अब इनके रिमांड की मांग कर सकती है ताकि वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और अन्य संदिग्ध संपर्कों की विस्तृत जांच की जा सके।


दूसरी ओर इस मामले में नामजद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस को लेकर भी गतिविधियां तेज हैं। हालांकि कार्रवाई के दौरान उनका पता नहीं चल सका। अधिकारियों का कहना है कि वे कथित तौर पर राज्य से बाहर हैं और उनकी लोकेशन की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसी उनसे भी पूछताछ की तैयारी में है।


रिशु श्री मामले को बिहार के हाल के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में गिना जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि सरकारी विभागों, इंजीनियरों, अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच हुए कथित वित्तीय लेन-देन की परतें खुलने पर कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल एसवीयू की इस कार्रवाई ने प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में जांच का दायरा और विस्तृत होने की संभावना जताई जा रही है।