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Ram Mandir Latest News : दान विवाद के बाद राम मंदिर में बड़ा बदलाव! CEO भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, इनलागों को मिलेगा मौका

राम मंदिर में पहली बार CEO की भर्ती! 20 साल का अनुभव, वैष्णव होना जरूरी, 18 जुलाई तक आवेदन का मौका। जानें योग्यता, उम्र सीमा और पूरी चयन प्रक्रिया।

Ram Mandir Latest News : दान विवाद के बाद राम मंदिर में बड़ा बदलाव! CEO भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, इनलागों  को मिलेगा मौका
Tejpratap
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6 मिनट

Ram Mandir Latest News :  श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा पेशेवर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ट्रस्ट ने सोमवार को राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। यह नियुक्ति प्रारंभिक रूप से तीन वर्षों के लिए होगी, जिसे आवश्यकता और प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया भी जा सकता है। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 जुलाई निर्धारित की गई है।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में मंदिर में दान राशि से जुड़ी अनियमितताओं के सामने आने के बाद ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार का फैसला किया था। इसी क्रम में ट्रस्ट की बैठक में CEO पद सृजित करने और चयन प्रक्रिया के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया था।

कौन कर सकता है आवेदन?

ट्रस्ट की ओर से जारी पात्रता मानदंड के अनुसार आवेदन करने वाला व्यक्ति 50 से 70 वर्ष की आयु का होना चाहिए। उम्मीदवार का स्नातक (Graduate) होना अनिवार्य है। इसके साथ ही हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का अच्छा ज्ञान आवश्यक माना गया है।

सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह रखी गई है कि उम्मीदवार हिंदू और श्रीरामभक्त वैष्णव परंपरा से जुड़ा होना चाहिए। ट्रस्ट का मानना है कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और मूल भावनाओं को समझने वाला व्यक्ति ही इस जिम्मेदारी का बेहतर निर्वहन कर सकेगा।

20 साल का प्रबंधन अनुभव जरूरी

CEO पद के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं, बल्कि लंबा प्रशासनिक अनुभव भी अनिवार्य रखा गया है। उम्मीदवार के पास कम से कम 20 वर्षों का प्रबंधकीय अनुभव होना चाहिए। यह अनुभव किसी सार्वजनिक संस्था, सरकारी विभाग, कंपनी या बड़े संगठन में प्रशासन, वित्त, लेखा, कार्मिक प्रबंधन, जनसंपर्क, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा या विधि जैसे क्षेत्रों में होना चाहिए।

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों के पास पहले किसी बड़े हिंदू मंदिर या धार्मिक संस्थान के संचालन का अनुभव होगा, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। सभी आवश्यक योग्यताएं रखने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी भी आवेदन कर सकेंगे।

वेतन बातचीत के आधार पर होगा तय

ट्रस्ट ने फिलहाल CEO के लिए कोई निश्चित वेतनमान घोषित नहीं किया है। चयनित उम्मीदवार के वेतन, सुविधाएं और अन्य सेवा शर्तें आपसी बातचीत के बाद तय की जाएंगी। हालांकि नियुक्त व्यक्ति को अयोध्या में रहकर पूर्णकालिक रूप से अपनी सेवाएं देनी होंगी।

क्या होगी CEO की जिम्मेदारी?

राम मंदिर के CEO को ट्रस्ट के महामंत्री के प्रति जवाबदेह बनाया जाएगा। उनकी जिम्मेदारी केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि मंदिर की पूरी संचालन व्यवस्था की निगरानी भी उनके हाथ में होगी।

CEO को मंदिर के वित्तीय प्रबंधन, प्रशासन, वैधानिक प्रक्रियाओं, कर्मचारियों के संचालन, विकास परियोजनाओं और संसाधनों के बेहतर उपयोग की जिम्मेदारी निभानी होगी। साथ ही मंदिर की कार्यप्रणाली को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए नई प्रक्रियाएं विकसित करनी होंगी।

सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा पर रहेगा विशेष फोकस

राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में नए CEO की प्रमुख जिम्मेदारियों में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना भी शामिल होगा। उन्हें स्थानीय प्रशासन, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा।

इसके अलावा VIP अतिथियों, संत-महात्माओं और विशेष अवसरों पर आने वाले श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं की निगरानी भी CEO के दायरे में रहेगी। मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा, निवेश और ट्रस्ट की नीतियों के अनुरूप वित्तीय निर्णय भी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा होंगे।

कॉर्पोरेट मॉडल पर चलेगा राम मंदिर प्रशासन

ट्रस्ट अब राम मंदिर के संचालन में कॉर्पोरेट गवर्नेंस मॉडल लागू करने की तैयारी कर रहा है। नई व्यवस्था के तहत हर कार्य के लिए स्पष्ट प्रक्रिया, जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी। बिना अनुमोदन के कोई भी कार्य आगे नहीं बढ़ सकेगा।

प्रत्येक विभाग के लिए अलग-अलग टीम बनाई जाएगी और हर टीम को निश्चित जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। किसी भी कार्य में गड़बड़ी होने पर संबंधित टीम की जवाबदेही तय होगी। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनने की उम्मीद है।

डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन मॉनिटरिंग पर जोर

नई प्रशासनिक व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी निगरानी, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को प्राथमिकता दी जाएगी। आय-व्यय, दान, खरीद और अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं का नियमित ऑडिट होगा। प्रत्येक निर्णय लिखित प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा ताकि मनमानी की संभावना समाप्त हो सके।

समन्वय को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग विभागों के व्हाट्सएप समूह बनाए जाएंगे और सभी कार्यों का रिकॉर्ड अलग-अलग रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। प्रस्ताव, अनुमोदन और स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया दस्तावेजी रूप से संचालित होगी।

सरकार का नहीं होगा हस्तक्षेप

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि CEO पूरी तरह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधीन कार्य करेगा। उसकी भूमिका और अधिकार ट्रस्ट तय करेगा तथा सरकार का मंदिर के दैनिक प्रशासन में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। ट्रस्ट का उद्देश्य ऐसी पेशेवर व्यवस्था विकसित करना है, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो, प्रशासन अधिक पारदर्शी बने तथा भविष्य में मंदिर का संचालन आधुनिक और जवाबदेह प्रणाली के तहत किया जा सके।