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पुलिस हेडक्वार्टर में तैनात कॉस्टेबल डेढ़ हफ्ते से गायब, मोबाइल लोकेशन मिलने के बाद ...

PATNA : देश में राज्य में रह रहे लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस प्रसाशन के हाथों में होती है। लोग अपनी छोटी से बड़ी समस्या के निवारण को लेकर पुलिस थाने जाते हैं। लेकिन, अब लोग

पुलिस हेडक्वार्टर में तैनात कॉस्टेबल डेढ़ हफ्ते से गायब, मोबाइल लोकेशन मिलने के बाद ...
Tejpratap
Tejpratap
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PATNA : देश में राज्य में रह रहे लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस प्रसाशन के हाथों में होती है। लोग अपनी छोटी से बड़ी समस्या के निवारण को लेकर पुलिस थाने जाते हैं। लेकिन, अब लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले एक पुलिस जवान पिछले डेढ़ हफ्ते से गायब है और इसका कोई सुराग नहीं मिल रहा है। यह जवान पटना स्थित सरदार पटेल भवन (पुलिस मुख्यालय) में तैनात है। 


दरअसल, बिहार पुलिस के कॉस्टेबल आशुतोष कुमार संदिग्ध रूप से लापता हो गये हैं। इस संबंध में परिवार वालों ने गर्दनीबाग थाने में अगवा की आशंका पर प्राथमिकी दर्ज करवायी है। लेकिन अभी तक इसका कोई सुराग नहीं मिला है। बेटे अनिकेत कुमार ने बताया कि उनका मोबाइल महज कुछ सेकेंड के लिए कई बार ऑन हुआ और जब तक कॉल लगाते उनका मोबाइल स्वीच ऑफ हो रहा है। 


बताया जा रहा है कि, आशुतोष कुमार बीते 24 अप्रैल को मुख्यालय के लिए पुलिस कॉलोनी स्थित घर से निकले थे। आधे रास्ते में विभागीय सीनियर से उनकी बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि मैं थोड़ी देर में पहुंच रहा हूं, लेकिन वह कार्यालय नहीं पहुंचे। देर रात तक जब वह वापस घर नहीं पहुंचे तो परिवार वालों को आशंका हुई। काफी छानबीन भी की पर उनका कुछ पता नहीं चल पाया। 


वहीं, बेटे ने बताया कि छानबीन के दौरान ही उनका मोबाइल कुछ सेकेंड के लिए ऑन हुआ। जैसे ही कॉल करना चाहा तो उनका मोबाइल ऑफ हो गया। वाकया तीन से चार दिन इसी तरह से हुआ। मोबाइल का लास्ट  लोकेशन निकाला गया तो पता चला कि मोबाइल हरिद्वार में एक आश्रम के आसपास है। लोकेशन मिलते ही 5 मई को परिवार हरिद्वार के लिए रवाना हो गया। 


जहां  चार दिन खोजबीन करने के बाद भी जब उनका पता नहीं चल पाया तो वह हरिद्वार के लोकल थाने पहुंचे, जहां से कहा गया कि पटना में की गयी प्राथमिकी की कॉपी दीजिए तो आपका साथ दिया जायेगा. बेटे ने बताया कि जब बताये गये लोकेशन के बारे में लोगों से पूछा तो लोग हिचकिचाने लगे. लग रहा था कि कुछ छिपा रहे हैं. लोकेशन तक पहुंच कर भी अंदर जाने का रास्ता नहीं मिला. इसके बाद परिवार 9 मई को पटना पहुंचकर गर्दनीबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज करवायी।