Bihar News : बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल Patna Medical College and Hospital ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट संबंधित थानों और अधिकारियों तक ऑनलाइन पहुंचाई जाएगी। इसके लिए फोरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी (एफएमटी) विभाग के लिए विशेष रूप से ‘मेडलीपर’ (MedLeaper) ऐप विकसित किया गया है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद पुलिसकर्मियों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। रिपोर्ट तैयार होते ही उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया जाएगा, जहां से संबंधित थाना और जांच अधिकारी उसे तुरंत प्राप्त कर सकेंगे।
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था?
एफएमटी विभाग में पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद डॉक्टर रिपोर्ट तैयार करेंगे। विभागाध्यक्ष की मंजूरी मिलने के बाद रिपोर्ट को मेडलीपर ऐप पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद कुछ ही मिनटों में संबंधित थाना और अधिकारियों के पास रिपोर्ट उपलब्ध हो जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर तैयार किए गए इस ऐप का उद्देश्य पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है। इससे रिपोर्ट के आदान-प्रदान में होने वाली देरी को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
अभी क्या है स्थिति?
वर्तमान में पीएमसीएच के एफएमटी विभाग में प्रतिदिन औसतन 10 से 12 पोस्टमार्टम किए जाते हैं। पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट तैयार होने में सामान्यतः एक से दो दिन का समय लग जाता है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसकी हार्ड कॉपी लेने के लिए संबंधित थाने के पुलिसकर्मियों को अस्पताल आना पड़ता है।
कई मामलों में रिपोर्ट प्राप्त करने में दो से तीन दिन तक का समय लग जाता है। इससे जांच प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।
ऑनलाइन रिपोर्टिंग सिस्टम को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए एफएमटी विभाग में अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है। विभाग में चार नए कंप्यूटर और ऑपरेटरों की नियुक्ति की योजना बनाई गई है, ताकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट डिजिटल माध्यम से तेजी से तैयार और अपलोड की जा सके।
अस्पताल प्रशासन का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से न केवल कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि रिकॉर्ड प्रबंधन भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित होगा।
एफएमटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार के अनुसार, यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में है। आवश्यक मानव संसाधन और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होते ही इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने से पुलिसकर्मियों को रिपोर्ट के लिए बार-बार अस्पताल नहीं आना पड़ेगा। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने और संबंधित थानों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बन जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट किसी भी आपराधिक या संदिग्ध मौत की जांच में महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। रिपोर्ट समय पर उपलब्ध होने से पुलिस जांच में तेजी आएगी और मामलों के निस्तारण में भी मदद मिलेगी। डिजिटल व्यवस्था से रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और भविष्य में जरूरत पड़ने पर रिपोर्ट तक आसान पहुंच भी सुनिश्चित होगी।
पीएमसीएच की यह पहल बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं और फोरेंसिक जांच प्रणाली के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे अस्पताल और पुलिस विभाग के बीच समन्वय बेहतर होगा तथा आम लोगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।





