1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 25 Jan 2026 03:52:49 PM IST
शंभू हॉस्टल मामले में कार्रवाई की मांग - फ़ोटो REPORTER
Patna Shambhu Girls Hostel case : पटना के मुन्नाचक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही छात्रा से कथित रेप और संदिग्ध हालात में मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की टीम शनिवार को पटना के सहज सर्जरी नर्सिंग होम पहुंची थी, जहां सबसे पहले छात्रा का इलाज कराया गया था। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष रह चुके वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह के क्लिनिक सहज के डॉक्टरों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों से एसआईटी की टीम ने पूछताछ की।
SSP ने इस गंभीर घटना के बाद चित्रगुप्त नगर थानेदार रौशनी कुमारी और कदमकुंआ के दारोगा हेमंत झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वही फॉरेंसिक टीम ने शनिवार को SIT को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म की पुष्टि की गई है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से रेप की पुष्टि की गई है, जो इस केस को और गंभीर बना देती है। अब इस मामले में बेगूसराय के मटिहानी विधानसभा क्षेत्र के विधायक नरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बोगो सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने डॉ. सहजानंद पर कार्रवाई की मांग की है। यह भी कहा है कि जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ संपूर्ण और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
मटिहानी से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) विधायक बोगो सिंह ने नीट छात्रा की संदेहास्पद मौत पर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हम भूमिहार समाज, बैकबर्ड समाज, फॉरवर्ड, हिन्दू समाज और मुस्लिम समाज की बात नहीं जानते। यादव और भूमिहार का सवाल नहीं है। बिहार में संपूर्ण रूप से सुशासन की सरकार में बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के जो नारे है वो संपूर्ण रूप से ढकोसला साबित हो रहा है। बिहार सरकार संपूर्ण रूप से बेटी को बचाने में विफल साबित हो रही है। हम इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। सड़क पर राजद परिवार के लोग उतरे हुए हैं। हम भी मृतका के परिवार के साथ हैं।
बोगो सिंह ने आगे कहा कि माननीय मुख्यमंत्री अचेतावस्था में हैं। बिहार में नीतीश कुमार का इकबाल खत्म हो चुका है साथ ही अपराधियों में पुलिस का भी इकबाल समाप्त हो गया है। बिहार में सुशासन की सरकार नहीं है बल्कि यह दुशासन की सरकार है। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है इसलिए हमने यह कहा कि यह भूमिहार, यादव, बैकवर्ड, फॉरवर्ड, हिन्दु, मुस्लिम का सवाल नहीं है, बेटी को बचाने का सवाल है। सुसाशन की सरकार संपूर्ण रूप से बिहार में फेल हो चुकी है। बोगो सिंह ने कहा कि डॉ सहजानंद सिंह पर कार्रवाई होनी चाहिए। जो इस केस में दोषी होंगे दुनिया की कोई भी हस्ती, कोई भी जाति, कोई भी धर्म हो कोई समझौता नहीं होनी चाहिए। जो दोषी होंगे उस पर संपूर्ण और कठोर रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
बता दें कि शनिवार को SIT की टीम ने डॉ. सहजानंद सिंह के नर्सिंग होम सहज में इलाज से जुड़े दस्तावेजों, इलाज की प्रक्रिया और वहां मौजूद चिकित्सकीय स्टाफ से पूछताछ की। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि छात्रा को किस हालत में अस्पताल लाया गया था, इलाज में क्या-क्या कदम उठाए गए और क्या इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, छात्रा के इलाज से जुड़ी हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके। इस बीच, इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “बिहार की विधि-व्यवस्था का जनाजा निकल चुका है। एक नाबालिग छात्रा के साथ इतनी बड़ी घटना हो जाती है और मुख्यमंत्री की चुप्पी आपराधिक है।” तेजस्वी यादव ने मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए दोषियों को कड़ी सजा देने की बात कही।
गौरतलब है कि 6 जनवरी 2025 को शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। स्थानीय लोगों और परिजनों ने मामले में गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। SIT को इस केस की हर पहलू से जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है। जांच के क्रम में SIT ने सबसे पहले छात्रा के हॉस्टल स्थित कमरे को सील कर दिया। फॉरेंसिक टीम को बुलाकर कमरे से साक्ष्य एकत्र किए गए। इसके साथ ही हॉस्टल में लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर, डिजिटल रिकॉर्ड और प्रवेश-निकास से जुड़े तमाम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी कब्जे में लिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय से ADG (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन और IG जितेंद्र राणा स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और जांच की प्रगति की समीक्षा की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि छात्रा की मौत से जुड़ा कोई भी पहलू नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
इस मामले में मृत छात्रा के परिजनों ने प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि छात्रा को वहां ले जाने के बाद सही इलाज नहीं दिया गया और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध है। उनका आरोप है कि यदि समय पर उचित इलाज और सही निर्णय लिया गया होता तो शायद छात्रा की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों के इन आरोपों ने मामले को और भी जटिल बना दिया है, क्योंकि अब जांच का दायरा हॉस्टल से लेकर कई अस्पतालों तक फैल चुका है। दूसरी ओर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) बिहार ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पटना के पुलिस कप्तान को पत्र लिखा है। IMA ने पत्र में कहा है कि इस घटना के बाद कुछ अस्पतालों और डॉक्टरों के खिलाफ सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर गलत एवं भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। इससे चिकित्सकों की छवि धूमिल हो रही है और उनकी सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो गया है। IMA ने अस्पताल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल, SIT की जांच कई बिंदुओं पर केंद्रित है—छात्रा की हॉस्टल में स्थिति, इलाज में हुई संभावित लापरवाही, अस्पतालों की भूमिका और घटना के समय मौजूद लोगों की जिम्मेदारी। पुलिस का दावा है कि जांच निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है। विपक्ष भी दोषियों पर कार्रवाई की मांग लगतार कर रहा है। इस मामले पर पूरे बिहार की नजर टिकी हुई है और हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर छात्रा की मौत के पीछे सच्चाई क्या है और दोषियों को कब तक सजा मिलेगी।