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Patna News: नगर निगम ने कई कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता, यह एक गलती पड़ गई भारी

Patna News: पटना नगर निगम ने 3 कर्मचारियों को बर्खास्त किया, आचार संहिता तोड़कर प्रचार में शामिल होने की मिली सजा। सुधीर कुमार, प्रवीण कुमार, राजीव रंजन पर हुई कार्रवाई..

Patna News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Patna News: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मुहिम तेज हो गई है। ऐसे में अब पटना नगर निगम ने तीन मानदेय कर्मचारियों को तत्काल सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने आचार संहिता लागू होने के बावजूद एक राजनीतिक दल के प्रत्याशी के साथ चुनाव प्रचार में सक्रिय भागीदारी की।


बांकीपुर अंचल में तैनात कर्मचारी सुधीर कुमार (मानदेय कर संग्राहक और अतिक्रमण प्रभारी), प्रवीण कुमार (मानदेय कर संग्राहक और प्रभारी सहायक) तथा राजीव रंजन सिंह सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में प्रचार करते स्पष्ट नजर आए। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने इसे सरकारी सेवा के कर्तव्य का घोर उल्लंघन बताते हुए अब कार्रवाई की है।


पूरे बिहार में लागू आदर्श आचार संहिता सरकारी कर्मचारियों को किसी भी राजनीतिक गतिविधि से दूर रहने का सख्त निर्देश देती है। तीनों कर्मचारियों की प्रचार में भागीदारी की खबरें वायरल होने पर नगर निगम ने 26 अक्टूबर को उन्हें शो-कॉज नोटिस जारी किया था। नोटिस में 48 घंटे का समय दिया गया था ताकि वे अपना स्पष्टीकरण दे सकें। हालांकि, प्राप्त जवाब संतोषजनक न होने पर नगर आयुक्त ने तुरंत सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया। नोटिस पत्र में स्पष्ट लिखा था, "आदर्श आचार संहिता के तहत सरकारी सेवक का राजनीतिक प्रचार में शामिल होना न केवल उल्लंघन है, बल्कि सेवा के आचरण के विरुद्ध भी है।" यह कार्रवाई चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है।


पटना नगर निगम के इस कदम से अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा, "चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए ऐसी कड़ाई जरूरी है। कोई भी उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" बांकीपुर अंचल में कर संग्रह और अतिक्रमण हटाओ अभियान की जिम्मेदारी संभालने वाले ये कर्मचारी अब बेरोजगार हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वे प्रत्याशी के साथ मंच साझा करते और प्रचार सामग्री बांटते दिखे जो आचार संहिता के धारा 4 के तहत स्पष्ट प्रतिबंध है। चुनाव आयोग ने भी राज्य स्तर पर सैकड़ों ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई की है।