NEET छात्रा मौत मामला: पीड़ित पक्ष के वकील का बड़ा बयान, मनीष रंजन के पॉकेट में है CBI

पटना में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में शंभू गर्ल्स हॉस्टल के संचालक मनीष रंजन की जमानत पर सुनवाई 11 मार्च तक टली। पीड़ित पक्ष ने CBI की जांच पर गंभीर सवाल उठाए।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 02, 2026, 4:03:48 PM

बिहार न्यूज

सीबीआई की कार्यशैली पर सवाल - फ़ोटो रिपोर्टर

Patna NEET student case:पटना में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में सुनवाई तेज हो गई है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई को लेकर बहस हुई। मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक के लिए स्थगित किया गया है। अब अगली सुनवाई 8 दिन बाद होगी। 


कोर्ट में सुनवाई के बाद पीड़ित पक्ष के वकील एस.के.पांडेय ने मीडिया से बातचीत को दौरान कहा कि मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई 11 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गयी है। जमानत पर आज कोई फैसला नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सीबीआई के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने  पिजड़े वाला तोता कहा था। नीट छात्रा केस में सीबीआई का जो कंडक्ट है उसे देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि सीबीआई मनीष रंजन के पॉकेट में है। इस केस में सीबीआई का कोई अस्तित्व नजर नहीं आ रहा है। 


उन्होंने बताया कि जब यह केस राज्य सरकार के द्वारा सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया। तब सीबीआई ने इस केस में एक अलग से एफआईआर दर्ज क्यों किया? जो केस राज्य सरकार द्वारा ट्रांसफर किया उस केस में पॉक्सो एक्ट की धारा लगी थी। सीबीआई ने जो दूसरा एफआईआर किया उस केस में पॉक्सो एक्ट की धारा जान-बूझकर नहीं लगायी गई। यदि लड़की की उम्र 18 साल से कम है। लड़की के मैट्रिक सर्टिफिकेट में भी 18 साल से कम उम्र दर्ज है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ है, प्राइवेट पार्ट क्षत विक्षत मिला। एफएसएल रिपोर्ट में ह्यूमन सिमेन की बात कही गयी। स्कूल सर्टिफिकेट के मुताबिक लड़की माइनर है, इसके बावजूद पॉक्सो एक्ट धाराओ को सीबीआई ने हटा दिया।


 सीबीआई अदालत से कहती है कि मनीष रंजन को जमानत दे दी जाए। सीबीआई जांच एजेंसी के तौर पर नहीं बल्कि मनीष रंजन के पॉकेट में रहते हुए मनीष रंजन के जमानत की पैरवी करती है। इस देश की हर बेटी निर्भया के इंसाफ की बात करती है। हमें यह नहीं पता कि सीबीआई वालों की बेटियां उनसे पूछती हैं या नहीं कि इस केस में इंसाफ होगा कि नहीं?


पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडेय ने आगे कहा कि इस केस में जिस तरह से सीबीआई अनुसंधान कर रही है, वह काफी शर्मनाक काफी दुखद है। हमलोगों ने इसके विरोध में एतराज जताया है। इस केस में हर जिम्मेवार पुलिस ऑफिसर हेमंत कुमार झा, रौशनी कुमारी, सचिवालय SDPO-1 डॉ. अन्नू कुमारी, एएसपी अभिनव कुमार, एसएसपी कार्तिकेय शर्मा, डीजीपी विनय कुमार, सीबीआई के एएसपी रैंक के ऑफिसर पवन श्रीवास्तव इन पर साक्ष्यों एवं सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का मुकदमा चलना चाहिए। ये लोग कानून से ऊपर नहीं है। सीबीआई को पावर ही नहीं है कि पॉक्सो एक्ट की धारा को हटा दें।


उन्होंने कहा कि एक ऐसा केस जिस पर लाखों करोड़ बेटियों की नजर हैं। बेटियां पूछ रही है कि इस केस में इंसाफ होगा या नहीं? कोर्ट में हमने अपनी बातों को रखा है। इन सारी चीजों को कोर्ट ने काफी गंभीरता से लिया है। अब सीबीआई की मनमर्जी कानून के विरुद्ध है। सीबीआई ने पॉक्सो एक्ट की धाराएं किस आधार पर हटाई। बिना किसी ठोस वजह से सीबीआई के द्वारा पॉक्सो एक्ट की धाराएं हटाना गैर कानूनी है। ये किसे फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। ऐसा क्यों किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि सुशासन की सरकार से भी हमारा सवाल है कि इंसाफ दिलवाने की पहली जिम्मेवारी सरकार की होती है क्यों कि जांच एजेंसियां सरकार के अधीन काम करती है। यदि जांच सही तरीके से निष्पक्ष और स्वतंत्र नहीं हो तो इंसाफ का मिलना लगभग नामुमकिन है। अदालत ने हम सबो की बातों को काफी गंभीरता से सुनी है। पॉक्सो एक्ट की धाराए लगने के बाद सेक्सुअल एसोल्ट, ह्युमन सीमेन, लड़की की एज 18 से कम यह भी कंफर्म है फिर भी सीबीआई ने पॉक्सो एक्ट की धारा क्यों हटाई? कोर्ट में इस संबंध में CBI के अधिकारी कुछ भी नहीं बोल पाए। 



क्या है पूरा मामला?

जहानाबाद की छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट यानि मेडिकल की तैयारी कर रही थी। 05 जनवरी को छात्रा गर्ल्स हॉस्टल में बेसुध हालत में मिली थी। अस्पताल ले जाने के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मौत के बाद परिजनों ने हॉस्टल संचालक और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। हत्या और दुष्कर्म की आशंका जताई। 09 जनवरी 2026 को पटना के चित्रगुप्त नगर थाना की पुलिस ने छात्रा के पिता के फर्द बयान पर मामला दर्ज किया था। परिजनों ने बताया था कि मृतका हॉस्टल में बेहोश मिली थी। पिता ने बेटी के शरीर पर चोट के निशान की बात कही थी। साथ ही, उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किए जाने का भी शक जाहिर किया था। इलाज के दौरान छात्रा की मौत अस्पताल में हो गई थी। मौत के बाद पटना में काफी हंगामा के बाद राज्य सरकार ने  31 जनवरी को मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी। इसके बाद सीबीआई अपनी प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

फर्स्ट बिहार के लिए पटना से सूरज कुमार की रिपोर्ट