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Nitish Kumar Rajya Sabha : बिहार की राजनीति में नया मोड़: मुख्यमंत्री रहते हुए राज्यसभा जाने वाले पहले नेता बने नीतीश कुमार, अब सूबे में आगे क्या ?

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले पहले नेता बन गए हैं। उनके इस फैसले के बाद अब बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

Nitish Kumar Rajya Sabha : बिहार की राजनीति में नया मोड़: मुख्यमंत्री रहते हुए राज्यसभा जाने वाले पहले नेता बने नीतीश कुमार, अब सूबे में आगे क्या ?
Tejpratap
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Nitish Kumar Rajya Sabha : बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने राज्यसभा जाने का फैसला कर राज्य की सियासत को नई दिशा दे दी है। गुरुवार सुबह सोशल मीडिया पर उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनने की इच्छा जाहिर की, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। कुछ ही घंटों बाद उन्होंने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया।


इस फैसले के साथ ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहते हुए राज्यसभा जाने वाले पहले नेता बन गए हैं। लगभग दो दशकों तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार का यह कदम राज्य की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।


सबसे ज्यादा बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड

नीतीश कुमार के नाम बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सबसे ज्यादा बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड दर्ज है। साल 2025 में एनडीए की जीत के बाद पटना के गांधी मैदान में उन्होंने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके इस रिकॉर्ड को अब तक कोई भी नेता नहीं तोड़ पाया है। तुलना की जाए तो तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री J. Jayalalithaa और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Virbhadra Singh छह-छह बार मुख्यमंत्री बने थे। वहीं सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री Pawan Kumar Chamling और ओडिशा के मुख्यमंत्री Naveen Patnaik पांच-पांच बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि इन सभी नेताओं के मुकाबले नीतीश कुमार का 10 बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड अभी भी सबसे आगे है।


अब बिहार की राजनीति में आगे क्या?

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, 16 मार्च को होने वाली प्रक्रिया के बाद नई सरकार के गठन की दिशा में कदम बढ़ेंगे। सबसे पहले एनडीए के दोनों प्रमुख दल—जदयू और भाजपा—अपने-अपने विधायक दल की बैठक करेंगे। इन बैठकों में विधायक दल के नेता और उपनेता का चुनाव किया जाएगा। इसके बाद एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें सर्वसम्मति से नए नेता का चयन किया जाएगा। नेता चुने जाने के बाद एनडीए का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेगा। बहुमत के आधार पर राज्यपाल नए नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे।


नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भाजपा कोई चौंकाने वाला नाम भी सामने ला सकती है।फिलहाल भाजपा की ओर से सबसे प्रमुख नाम उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary का लिया जा रहा है। माना जा रहा है कि अगर भाजपा को मुख्यमंत्री पद मिलता है तो सम्राट चौधरी सबसे मजबूत दावेदार हो सकते हैं।इसके अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री Nityanand Rai का नाम भी चर्चा में है। राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि भाजपा और जदयू के बीच सहमति के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।


बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले को बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के बाद अब उनका राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ना कई संकेत दे रहा है। वहीं राज्य की राजनीति में भी नेतृत्व परिवर्तन की संभावना से नई राजनीतिक समीकरण बनने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि बिहार की सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी और एनडीए किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा। फिलहाल इतना तय है कि नीतीश कुमार के इस फैसले ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है, जिसका असर आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा पर साफ दिखाई देगा।

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