Bihar News : बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि Nitish Kumar अब राज्यसभा में नई भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। शुक्रवार को वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं, जिसके बाद उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि खरमास खत्म होने के बाद बिहार में नई सरकार का गठन हो सकता है। ऐसे में राज्य की सियासत एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है।
करीब दो दशकों तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार का कार्यकाल कई बड़े फैसलों और योजनाओं के लिए याद किया जाता है। उन्होंने विकास, सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए कई ऐसी पहल कीं, जिनका असर आज भी राज्य में दिखाई देता है। यही वजह है कि उनके फैसलों को बिहार के विकास की नई दिशा देने वाला माना जाता है।
नीतीश कुमार के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में उठाए गए कदम शामिल हैं। पुलिस विभाग में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला काफी अहम माना गया। इसके अलावा पंचायत और नगर निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण देकर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत किया गया। इससे ग्रामीण और शहरी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली।
महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ की शुरुआत की गई, जिसके तहत पहले 10 हजार रुपये की सहायता दी गई और बाद में इसे बढ़ाकर दो लाख रुपये तक कर दिया गया। साथ ही ‘जीविका दीदी’ कार्यक्रम के विस्तार ने लाखों महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का अवसर प्रदान किया।
नीतीश सरकार का एक और बड़ा और चर्चित फैसला बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू करना रहा। इसे उनके ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में देखा गया। हालांकि इस फैसले को लेकर कई तरह की बहस भी हुई, लेकिन सरकार का दावा रहा कि इससे सामाजिक सुधार में मदद मिली है।
विकास के क्षेत्र में ‘सात निश्चय योजना’ को भी काफी अहम माना जाता है। इस योजना के तहत राज्य के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, रोजगार और शहरी विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। हाल ही में ‘सात निश्चय पार्ट-3’ को भी मंजूरी दी गई, जिससे आने वाले समय में और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।
बिहार में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘हर घर बिजली’ योजना को सफलतापूर्वक लागू किया गया। खासकर ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके अलावा शिक्षा के क्षेत्र में साइकिल और पोशाक योजना ने छात्रों को स्कूल तक लाने में अहम भूमिका निभाई, जिससे खासकर बालिकाओं की शिक्षा में सुधार हुआ।
सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी नीतीश कुमार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। बिहार में जातिगत जनगणना कराना एक ऐतिहासिक फैसला माना गया, जिसने सामाजिक और आर्थिक नीतियों के निर्माण में नई दिशा दी। इसके अलावा 2007 में महादलित आयोग की स्थापना कर समाज के सबसे पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किए गए।
कुल मिलाकर, Nitish Kumar का मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल कई अहम फैसलों और योजनाओं से भरा रहा है, जिसने बिहार की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब जब वे राज्यसभा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और नई सरकार किन प्राथमिकताओं के साथ काम करती है।






