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NITISH KUMAR : अब मजदूरों पर मेहरबान हुई नीतीश सरकार, न्यूनतम मजदूरी में हुई इतने रुपए की बढ़ोतरी; जानें नई दरें

बिहार में न्यूनतम मजदूरी की दर बढ़ा दी गई है। नई दरों के मुताबिक अब अतिकुशल कामगारों को 660 रुपये, कुशल को 541 रुपये, अर्धकुशल को 444 रुपये तथा और अकुशल मजदूरों को 428 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी मिलेगी।

NITISH KUMAR
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Tejpratap
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NITISH KUMAR : बिहार सरकार ने राज्य में न्यूनतम मजदूरी की दर बढ़ा दी है। श्रम संसाधन विभाग की अधिसूचना के अनुसार, नई मजदूरी दरें 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी होंगी। अधिसूचना के मुताबिक, अब अतिकुशल कामगारों को प्रतिदिन 660 रुपये, कुशल कामगारों को 541 रुपये, अर्धकुशल कामगारों को 444 रुपये और अकुशल मजदूरों को 428 रुपये न्यूनतम मजदूरी के रूप में दी जाएगी। यह फैसला राज्य में मजदूरों की आर्थिक सुरक्षा और जीवन यापन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।


सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों में बढ़ोतरी को देखते हुए मजदूरी दरों में यह संशोधन किया गया है। इससे न केवल मजदूरों की आमदनी में वृद्धि होगी, बल्कि उनके जीवन स्तर में सुधार भी आएगा। श्रम विभाग ने मजदूरों और नियोक्ताओं को इस नई अधिसूचना के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने का भी निर्णय लिया है।


विशेषज्ञों का मानना है कि नई दरों से छोटे और मध्यम उद्योगों पर असर पड़ सकता है, लेकिन राज्य सरकार ने इसे मजदूर हित में आवश्यक कदम बताया है। इसके अलावा, श्रम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई दरें सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों में लागू होंगी। मजदूरों ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे लंबे समय से प्रतीक्षित सुधार माना जा रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में मजदूर यूनियनों और संगठनों ने इसे मजदूर अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।


राज्य सरकार ने यह भी कहा कि समय-समय पर मजदूरी दरों की समीक्षा की जाएगी ताकि मजदूरों को उनकी मेहनत के अनुसार उचित वेतन मिल सके। इसके तहत भविष्य में भी मजदूरी दरों में सुधार की संभावना बनी रहेगी। सरकार ने नियोक्ताओं से अपील की है कि वे नई मजदूरी दरों का पालन करें और किसी भी प्रकार के उल्लंघन की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम राज्य में सामाजिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी अहम माना जा रहा है।


बिहार में न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का यह फैसला उन लाखों मजदूरों के लिए राहत भरा साबित होगा, जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष करते हैं। इससे मजदूर वर्ग की आमदनी में बढ़ोतरी होगी और उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार आएगा। कुल मिलाकर, बिहार सरकार की यह नई नीति मजदूर हितैषी कदम के रूप में देखी जा रही है, जो आर्थिक असमानता को कम करने और श्रम बाजार को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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