पटना : नेपाल में रविवार की सुबह बूढ़ी गंडकी नदी ने अचानक ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि इसकी तस्वीरें सामने आते ही बिहार में भी चिंता बढ़ गई। नेपाल के गोरखा जिले के चुमनुब्री इलाके में भूस्खलन के बाद नदी में अचानक पानी का तेज बहाव देखने को मिला। कई मकानों और पुलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल बिहार को लेकर उठने लगा है—क्या नेपाल की इस बाढ़ का असर बिहार तक पहुंचेगा? क्या एक बार फिर प्रदेश की नदियां खतरे के निशान की ओर बढ़ेंगी?
नेपाल में सामने आई तस्वीरों ने बिहार की चिंता इसलिए बढ़ा दी, क्योंकि नेपाल की कई नदियों का सीधा असर बिहार के नदी तंत्र पर पड़ता है। ऐसे में पड़ोसी देश में अचानक आई बाढ़ के बाद बिहार के लोगों की नजर बूढ़ी गंडकी के जलस्तर और नदी के प्रवाह पर टिक गई है।
हालांकि, बिहार सरकार ने फिलहाल लोगों को राहत देने वाली बात कही है। जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने साफ किया है कि नेपाल में आई इस बाढ़ से बिहार को फिलहाल किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। मंत्री के मुताबिक, नेपाल में भूस्खलन के कारण नदी के पानी में गाद की मात्रा काफी अधिक है। इससे पानी के सामान्य प्रवाह पर असर पड़ा है। इसलिए अभी इसे बिहार के लिए तत्काल बाढ़ का खतरा नहीं माना जा रहा है।
भूस्खलन से बदला नदी का प्रवाह
जानकारी के अनुसार, नेपाल के गोरखा जिले के चुमनुब्री इलाके में भूस्खलन के कारण बूढ़ी गंडकी नदी की एक सहायक धारा का प्रवाह प्रभावित हुआ। इसके बाद पानी ने तेजी से नीचे की तरफ रास्ता बनाया। अचानक आए इस सैलाब ने नदी के आसपास के इलाकों में तबाही मचा दी।
कई जगहों पर घरों और पुलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। घटना के बाद नेपाल के स्थानीय प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क किया है। राहत और बचाव एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। यही तस्वीरें जब बिहार तक पहुंचीं तो लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा कि नेपाल से आने वाला पानी बिहार में भी परेशानी बढ़ा सकता है या नहीं।
वाल्मीकिनगर बराज से करीब 200 किमी दूर है घटनास्थल
जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने खतरे की आशंका को स्पष्ट करते हुए बताया कि नेपाल में जहां भूस्खलन हुआ है, वह स्थान बिहार के वाल्मीकिनगर बराज से करीब 200 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा भूस्खलन के कारण नदी में गाद की मात्रा अधिक होने से पानी के प्रवाह की स्थिति भी सामान्य बाढ़ जैसी नहीं है।
मंत्री ने कहा कि बिहार में इसका कितना असर होगा, इसका वास्तविक आकलन नदी के प्रवाह और जलस्तर की स्थिति देखकर ही किया जा सकता है। यानी फिलहाल किसी बड़े खतरे की बात नहीं है, लेकिन नदियों के जलस्तर पर नजर रखना जरूरी है।
बिहार में पहले से चेतावनी स्तर के ऊपर बूढ़ी गंडक
नेपाल की घटना से फिलहाल बिहार को तत्काल खतरा नहीं बताया गया है, लेकिन चिंता की एक वजह यह भी है कि राज्य में बूढ़ी गंडक नदी के कुछ स्थानों पर पानी पहले से ही चेतावनी स्तर के ऊपर बह रहा है।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मुजफ्फरपुर के कांटी में बूढ़ी गंडक का जलस्तर 53.61 मीटर दर्ज किया गया। यहां चेतावनी स्तर 53.09 मीटर है, जबकि खतरे का स्तर 54.09 मीटर निर्धारित है। यानी नदी यहां चेतावनी स्तर से ऊपर है, हालांकि अभी खतरे के निशान से नीचे है।
इसी तरह खगड़िया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर 36.32 मीटर दर्ज किया गया। यहां चेतावनी स्तर 35.58 मीटर और खतरे का स्तर 36.58 मीटर है। इसका मतलब है कि खगड़िया में भी पानी चेतावनी स्तर को पार कर चुका है और खतरे के निशान से महज कुछ दूरी पर है।
भागलपुर में कटाव पर भी नजर
विजय चौधरी ने भागलपुर के महादेवपुर में कटाव की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कटाव से बचाव के लिए अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद हैं और जरूरी काम कराया जा रहा है। फिलहाल वहां भी किसी बड़े खतरे की स्थिति नहीं बताई गई है।
यानी नेपाल में बूढ़ी गंडकी का सैलाब बिहार के लिए अभी तत्काल खतरे की घंटी नहीं है, लेकिन बिहार की नदियों का मौजूदा जलस्तर इसे नजरअंदाज करने की स्थिति भी नहीं देता। खासकर बूढ़ी गंडक के जिन इलाकों में पानी पहले ही चेतावनी स्तर पार कर चुका है, वहां आने वाले घंटों में जलस्तर में होने वाला बदलाव महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल बिहार सरकार का कहना है कि नेपाल की घटना से प्रदेश को तत्काल खतरा नहीं है। लेकिन नेपाल में नदी का प्रवाह, गाद की स्थिति और बिहार की नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ऐसे में आने वाले अपडेट यह तय करेंगे कि नेपाल के इस सैलाब का असर बिहार तक कितना पहुंचता है।




