LPG Cylinder Delivery Rule: अब बिना ओटीपी नहीं मिलेगा गैस सिलेंडर, मार्च से सख़्त होगी व्यवस्था

मार्च से LPG सिलेंडर डिलीवरी के लिए OTP अनिवार्य। बिना OTP गैस नहीं मिलेगी। जानें नया नियम, प्रक्रिया और उपभोक्ताओं पर असर।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 01, 2026, 9:05:07 AM

LPG Cylinder Delivery Rule: अब बिना ओटीपी नहीं मिलेगा गैस सिलेंडर, मार्च से सख़्त होगी व्यवस्था

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LPG Cylinder New Rule : देशभर में घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है। तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी प्रक्रिया में ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) को अनिवार्य कर दिया है। मार्च महीने से यह नियम और भी सख़्ती के साथ लागू किया जाएगा। साफ कर दिया गया है कि अब बिना ओटीपी बताए किसी भी स्थिति में गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं होगी।


सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले का मकसद सिस्टम में पारदर्शिता लाना और लंबे समय से मिल रही फर्जी डिलीवरी की शिकायतों पर रोक लगाना है। कई क्षेत्रों से यह शिकायत मिल रही थी कि सिलेंडर की डिलीवरी कागजों में तो पूरी दिखा दी जाती थी, लेकिन उपभोक्ता के घर तक गैस सिलेंडर पहुंचता ही नहीं था। इसके अलावा कालाबाजारी और बिचौलियों की मनमानी की भी शिकायतें सामने आती रही हैं। नई डिजिटल व्यवस्था को इन गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के तौर पर देखा जा रहा है।


नई प्रक्रिया के तहत जब कोई उपभोक्ता गैस सिलेंडर बुक करेगा, तो उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा। डिलीवरी बॉय जब सिलेंडर लेकर उपभोक्ता के घर पहुंचेगा, तब ग्राहक को वही ओटीपी बताना होगा। डिलीवरी कर्मी उस ओटीपी को अपने हैंडहेल्ड डिवाइस में दर्ज करेगा। ओटीपी का मिलान होते ही सिस्टम में डिलीवरी कन्फर्म हो जाएगी और सिलेंडर सौंप दिया जाएगा। यदि उपभोक्ता ओटीपी नहीं बता पाता है, तो डिलीवरी अधूरी मानी जाएगी और सिलेंडर वापस ले जाया जाएगा।


कंपनियों का दावा है कि इस व्यवस्था से फर्जी एंट्री और घोटालों की संभावना काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सब्सिडी वाला सिलेंडर सही उपभोक्ता तक ही पहुंचे। साथ ही, हर डिलीवरी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे निगरानी और ऑडिट करना आसान हो जाएगा।


कुछ उपभोक्ताओं ने यह चिंता भी जताई है कि जिनका मोबाइल नंबर गैस एजेंसी में अपडेट नहीं है या जिनके पास पंजीकृत नंबर उपलब्ध नहीं है, उन्हें सिलेंडर लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसे मामलों में कंपनियों से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की जा रही है, जैसे आधार सत्यापन या कॉल आधारित पुष्टि प्रणाली। कंपनियों ने संकेत दिया है कि विशेष परिस्थितियों में समाधान के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।


कुल मिलाकर, रसोई गैस की डिलीवरी अब पूरी तरह डिजिटल निगरानी के दायरे में आ गई है। यह कदम व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह बदलाव आम जनता के लिए कितना सहज और कारगर साबित होता है, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि अब सिलेंडर वही पाएगा, जो ओटीपी बताएगा।