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बिहार में मां बनने वाली हर 10 में से 1 युवती नाबालिग, हेल्थ सर्वे ने बढ़ाई चिंता

Bihar News: बिहार में कम उम्र में शादी और किशोरियों के मां बनने की समस्या को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। हालिया सर्वे रिपोर्ट ने राज्य में बाल विवाह, किशोर गर्भधारण और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट...

बिहार में मां बनने वाली हर 10 में से 1 युवती नाबालिग, हेल्थ सर्वे ने बढ़ाई चिंता
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar News: बिहार में कम उम्र में शादी और किशोरियों के मां बनने की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) की रिपोर्ट में कई ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में मां बनने वाली महिलाओं में करीब 11 प्रतिशत किशोरियां शामिल हैं। यानी हर 10 गर्भवती महिलाओं में एक नाबालिग लड़की है, जो कम उम्र में ही मातृत्व की जिम्मेदारी उठाने को मजबूर है।


सर्वे में यह भी सामने आया है कि बिहार में आज भी बड़ी संख्या में लड़कियों की शादी कानूनी उम्र से पहले कर दी जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 35 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में हो रही है। वहीं 29.3 प्रतिशत लड़कों की शादी भी 21 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले कर दी जाती है। हालांकि पिछले पांच वर्षों की तुलना में इन आंकड़ों में कुछ कमी दर्ज की गई है, लेकिन स्थिति अब भी चिंता पैदा करने वाली है।


रिपोर्ट बताती है कि पांच साल पहले बिहार में 40.8 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो जाती थी, जबकि 30.5 प्रतिशत लड़कों की शादी 21 साल से कम उम्र में कर दी जाती थी। आंकड़ों में गिरावट जरूर आई है, लेकिन किशोरियों के मां बनने के मामलों में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र में गर्भधारण मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। एसकेएमसीएच की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. विभा वर्मा के अनुसार, किशोरावस्था में मां बनने वाली लड़कियों में खून की कमी सबसे बड़ी समस्या होती है। कई मामलों में गर्भवती किशोरियों के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बेहद कम पाया जाता है, जिससे प्रसव के दौरान गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।


उन्होंने बताया कि कम उम्र में गर्भवती होने वाली लड़कियों में हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में सूजन, समय से पहले प्रसव और बच्चे की मौत जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा किशोरियां अक्सर स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूक नहीं होतीं, जिससे मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।


रिपोर्ट में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच को लेकर भी चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। बिहार में केवल 38 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं ही प्रसव से पहले जरूरी चारों स्वास्थ्य जांच पूरी करा रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, गर्भावस्था की पहली जांच के लिए 64 प्रतिशत महिलाएं अस्पताल पहुंचती हैं, लेकिन समय के साथ यह संख्या लगातार घटती जाती है और चौथी जांच तक पहुंचते-पहुंचते आधी रह जाती है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच बेहद जरूरी होती है। इससे मां और गर्भ में पल रहे बच्चे की स्थिति का समय-समय पर पता चलता रहता है और किसी भी संभावित खतरे का पहले ही इलाज किया जा सकता है।


हालांकि रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। बिहार में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सुधार देखने को मिला है। सर्वे के अनुसार, राज्य में बच्चों में बौनेपन (स्टंटिंग) की समस्या में कमी आई है। वर्तमान में 35.6 प्रतिशत बच्चे बौनेपन का शिकार हैं, जबकि पांच साल पहले यह आंकड़ा 43 प्रतिशत था।