IRCTC Scam : आईआरसीटीसी घोटाला ममाले में आरोप तय होने के फैसले को लेकर लालू यादव पहुंचे दिल्ली हाईकोर्ट, सोमवार को होगी सुनवाई

देश के चर्चित आईआरसीटीसी घोटाले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 04 Jan 2026 10:30:02 AM IST

IRCTC Scam : आईआरसीटीसी घोटाला ममाले में आरोप तय होने के फैसले को लेकर लालू यादव पहुंचे दिल्ली हाईकोर्ट, सोमवार को होगी सुनवाई

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IRCTC Scam : देश के चर्चित आईआरसीटीसी घोटाले (IRCTC Scam) में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। लालू यादव ने ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के तहत आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी है। उनकी याचिका पर सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की एकल पीठ सुनवाई करेगी। इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।


दरअसल, अक्टूबर 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी घोटाले में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय किए थे। ट्रायल कोर्ट का मानना था कि प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिनके आधार पर मुकदमा चलाया जा सकता है। आरोप तय होने के बाद से ही लालू यादव इस आदेश को चुनौती देने की तैयारी में थे, और अब उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है।


इस मामले में लालू यादव अकेले आरोपी नहीं हैं। उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा उनके बेटे, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी इस केस में आरोपी हैं। राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर भी आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा आईआरसीटीसी के तत्कालीन अधिकारियों और कुछ निजी व्यक्तियों को भी इस घोटाले का आरोपी बनाया गया है।


राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने आरोप तय करते हुए अपने आदेश में कहा था कि जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे, तब उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया। कोर्ट ने यह भी पाया कि आईआरसीटीसी से जुड़े होटल टेंडरों की प्रक्रिया को प्रभावित किया गया और इसमें लालू यादव की भूमिका सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि वे पूरी साजिश से अवगत थे। अदालत के अनुसार, निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी सीधी संलिप्तता सामने आती है, इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा चलाना उचित है।


आईआरसीटीसी घोटाले की जड़ें वर्ष 2004 से 2009 के बीच की बताई जाती हैं, जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि इस दौरान आईआरसीटीसी के पटना और पुरी स्थित होटलों के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसी के अनुसार, ये टेंडर कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर मनपसंद और चहेती कंपनियों को दिए गए।


सीबीआई का दावा है कि इन होटलों के टेंडर देने के बदले लालू यादव के परिवार को रिश्वत के रूप में जमीन दी गई। यह जमीन पटना समेत अन्य स्थानों पर बेहद कम कीमत पर या नाममात्र के सौदों के जरिए परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर ट्रांसफर की गई। इसी आधार पर सीबीआई ने इसे “जमीन के बदले टेंडर” घोटाला बताया है।


सीबीआई ने वर्ष 2017 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव के अलावा आईआरसीटीसी के तत्कालीन अधिकारियों और अन्य निजी व्यक्तियों के नाम शामिल थे। आगे की जांच के बाद सीबीआई ने इस केस में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें लालू यादव समेत कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया। चार्जशीट में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।


अब दिल्ली हाईकोर्ट में लालू यादव की याचिका पर सुनवाई होनी है, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की है। उनकी ओर से दलील दी जा सकती है कि आरोप तय करने का आदेश कानून और तथ्यों के अनुरूप नहीं है तथा उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। वहीं, सीबीआई इस आदेश का समर्थन करते हुए यह कह सकती है कि ट्रायल कोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आरोप तय किए हैं।


इस मामले की सुनवाई पर राजनीतिक नजरें भी टिकी हैं, क्योंकि लालू यादव और उनका परिवार बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाता रहा है। यदि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती है, तो ट्रायल कोर्ट में इस मामले की नियमित सुनवाई आगे बढ़ेगी, जो लालू यादव और राजद के लिए एक बार फिर बड़ी कानूनी चुनौती साबित हो सकती है।