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बिहार में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव लड़ने वाले कितना खर्च कर पाएंगे, जान लीजिए.. पूरा अपडेट

PATNA : बिहार में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव पहली बार सीधे होने जा रहा है। राज्य के अंदर इस बार निकाय चुनाव के दौरान पहली बार मेयर और डिप्टी पद के उम्मीदवारों का चुनाव सीधे

बिहार में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव लड़ने वाले कितना खर्च कर पाएंगे, जान लीजिए.. पूरा अपडेट
Editor
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PATNA : बिहार में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव पहली बार सीधे होने जा रहा है। राज्य के अंदर इस बार निकाय चुनाव के दौरान पहली बार मेयर और डिप्टी पद के उम्मीदवारों का चुनाव सीधे जनता करेगी। राज्य सरकार ने इस फैसले पर काफी पहले ही मंजूरी दे दी थी, अब सारी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार ने यह भी तय कर दिया है कि मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव पर कितना खर्च किया जा सकता है। सरकार की तरफ से जो फार्मूला तय किया गया है वह मेयर और डिप्टी मेयर के लिए चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को मानना होगा। 


राज्य सरकार ने मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव खर्च की सीमा तय कर दी है। इन दोनों पदों के लिए तय फार्मूले के मुताबिक पटना नगर निगम क्षेत्र में मेयर और डिप्टी मेयर पद के उम्मीदवार किसी भी शहरी विधानसभा सीट से तीन-चार गुणा अधिक मतदाताओं की तरफ चुने जाएंगे लेकिन उनकी चुनाव खर्च की सीमा विधायक का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से कम होगी।राज्य में मेयर और डिप्टी मेयर के उम्मीदवार चुनाव में 30 लाख रुपए तक खर्च कर पाएंगे जबकि विधानसभा उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 40 लाख रुपए है। 


खर्च का फार्मूला तय करने के लिए वार्ड पार्षद के चुनाव के खर्च और वार्डों की कुल संख्या को आधार पर बनाया गया है। पटना के मेयर और डिप्टी मेयर के होने वाले चुनाव में 12 लाख से अधिक वोटर हैं। सरकार ने अपने फॉर्मूले के मुताबिक 4 हजार से 40 हजार वोटर्स की संख्या वाले वार्ड पर खर्च की सीमा 60 हजार रुपए तक की है जबकि 10000 से 20000 वोटर्स की संख्या वाले वार्ड में खर्च की सीमा 80000 तक की है। इसे देखते हुए ही मेयर और डिप्टी मेयर के उम्मीदवारों की खर्च सीमा तय की गई है। आपको बता दें कि लोकसभा में उम्मीदवारों को 95 लाख रुपए खर्च करने की इजाजत होती है। विधानसभा चुनाव में 40 लाख। नगर निगम के वार्ड पार्षद के पद के उम्मीदवार की खर्च सीमा को उस नगर निगम के कुल वार्ड से गुणा कर दो से भाग देने पर जो राशि आएगी, उतनी ही राशि मेयर और डिप्टी मेयर पद के प्रत्याशी चुनाव में खर्च कर पाएंगे। यही फार्मूला नगर पंचायत, नगर परिषद के सभापति और उपसभापति के पद के लिए भी होगा।

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