1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 15 Jan 2026 07:29:14 AM IST
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Lalu Yadav News : आईआरसीटीसी घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव तथा उनके बेटे, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को दिल्ली उच्च न्यायालय से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस मामले में चल रहे आपराधिक मुकदमे पर रोक नहीं लगाएगा। हालांकि अदालत ने यह संकेत जरूर दिया कि आरोप तय करने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर वह अगले सप्ताह अंतिम फैसला सुना सकती है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने कहा कि अधीनस्थ अदालत को गवाहों की मुख्य जांच (एग्जामिनेशन-इन-चीफ) जारी रखने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन जिरह की प्रक्रिया अगले से अगले सप्ताह शुरू की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि वह इस बीच लालू-तेजस्वी की याचिकाओं पर बहस पूरी कर आदेश पारित कर देगी।
ट्रायल पर रोक से इनकार
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान ट्रायल पर रोक लगाने के मुद्दे पर सुनवाई के लिए बुधवार की तारीख तय की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक आरोप तय करने के खिलाफ याचिकाएं लंबित हैं, तब तक अधीनस्थ अदालत में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई जानी चाहिए।
इस पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा,“मुख्य जांच होने दीजिए। मैं इस पर रोक नहीं लगा रही हूं।”उन्होंने आगे कहा कि रोक के मुद्दे पर अलग से फैसला देने के बजाय वह पूरे मामले पर ही अगले सप्ताह अंतिम आदेश पारित करेंगी।
सीबीआई को भी संयम बरतने का निर्देश
अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के वकील से भी कहा कि वह फिलहाल जिरह पर जोर न दें। अदालत ने कहा,“अगले से अगले सप्ताह जिरह शुरू करें। इस बीच मैं बहस समाप्त करके आदेश सुना दूंगी।” अदालत ने यह भी जोड़ा कि सीबीआई अपनी ओर से गवाहों की पूछताछ जारी रख सकती है, लेकिन जिरह को कुछ समय के लिए टालना उचित होगा।
13 अक्टूबर 2025 को तय हुए थे आरोप
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2025 को अधीनस्थ अदालत ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। ये आरोप भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत लगाए गए हैं। अदालत ने कथित तौर पर आईआरसीटीसी के होटल ठेकों में अनियमितता, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर माना था।
“साठगांठ वाले पूंजीवाद” की तीखी टिप्पणी
अधीनस्थ अदालत ने अपने आदेश में इस मामले को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि जमीन और शेयरों का लेन-देन “संभवतः रांची और पुरी में रेलवे के होटलों में निजी भागीदारी हासिल करने की आड़ में पनपे साठगांठ वाले पूंजीवाद का उदाहरण है।”इस टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा की थी।
लालू यादव का दावा – कोई सबूत नहीं
लालू प्रसाद यादव की ओर से दाखिल याचिका में आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि सीबीआई न तो कोई ठोस दस्तावेजी सबूत पेश कर पाई है, न ही किसी गवाह के बयान से यह साबित होता है कि किसी अपराध को अंजाम देने के लिए कोई साजिश रची गई थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद नहीं है, जिससे यह संकेत मिले कि आईआरसीटीसी के किसी अधिकारी के साथ निविदा प्रक्रिया में हेरफेर को लेकर कोई बैठक या सहमति बनी थी।
अन्य आरोप और आरोपी
इस मामले में अदालत ने प्रदीप कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र कुमार अग्रवाल, राकेश कुमार गोगिया और विनोद कुमार अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) तथा 13(1)(घ)(2) और (3) के तहत आरोप तय किए हैं। ये धाराएं लोक सेवक द्वारा पद के दुरुपयोग और आपराधिक कदाचार से संबंधित हैं। इसके अलावा लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत भी आरोप तय किए गए हैं।
अब सबकी नजरें दिल्ली हाईकोर्ट के अगले सप्ताह आने वाले फैसले पर टिकी हैं। यदि अदालत आरोप तय करने के आदेश को बरकरार रखती है, तो निचली अदालत में ट्रायल पूरी गति से आगे बढ़ेगा। वहीं, यदि याचिकाएं स्वीकार होती हैं, तो इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा बदल सकती है। राजनीतिक रूप से भी यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें बिहार की सत्ताधारी पार्टी के शीर्ष नेता सीधे तौर पर आरोपी हैं।