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Bihar News : छत गिरने से दाउदनगर पीएचसी में बाल-बाल बचे डॉक्टर और मरीज, फिर उठी नए भवन की मांग

Bihar News :दाउदनगर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब ओपीडी में इलाज के दौरान छत का हिस्सा गिर पड़ा। सौभाग्य से डॉक्टर और मरीज बाल-बाल बच गए। जर्जर भवन को लेकर वर्षों से नई बिल्डिंग की मांग की जा रही है|

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दाउदनगर पीएचसी की ओपीडी में गिरा छत का हिस्सा
© Google
Nitish Kumar
Nitish Kumar
3 मिनट

Bihar News : शनिवार सुबह करीब 11 बजे दाउदनगर-बारुण रोड पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में उस वक्त अफरातफरी मच गई जब ओपीडी में इलाज कर रहे चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनमोल कुमार और वहां मौजूद मरीजों के ऊपर अचानक छत का एक हिस्सा गिर गया। सौभाग्य से सभी लोग बाल-बाल बच गए। इस दौरान OPD में 5-7 मरीजों की भीड़ थी।


घटना के तुरंत बाद गिरा हुआ मलबा हटाया गया, लेकिन यह हादसा स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की एक और बानगी बन गया है। इससे पहले मई 2021 में प्रसव कक्ष की छत का हिस्सा गिर चुका है। उस दौरान भी महज कुछ मिनट पहले एक गर्भवती महिला का सफल प्रसव कर उसे वार्ड में शिफ्ट किया गया था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया था। टीकाकरण कक्ष के पास भी छत गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं।


62 साल पुराना भवन, 5 वर्षों से मांग अधूरी

1963 में बने इस PHC भवन की हालत अब बेहद जर्जर हो चुकी है। छत से लगातार प्लास्टर झड़ता है और बरसात में पानी टपकता है। डॉक्टरों के ठहरने के लिए उपयुक्त कमरे नहीं हैं। एनएचआरएम के तहत बने एक भवन में डॉक्टर किसी तरह नाइट ड्यूटी करते हैं, जहां दस्तावेज तक सुरक्षित रखना मुश्किल है।


दाउदनगर, ओबरा और बारुण प्रखंडों के साथ-साथ रोहतास जिले के नासरीगंज प्रखंड तक की लगभग डेढ़ से दो लाख आबादी इस पीएचसी पर निर्भर है। यहां नियमित टीकाकरण और ओपीडी सेवाएं चलती हैं। बावजूद इसके पिछले 5 वर्षों से नए भवन की मांग सिर्फ कागजों और चर्चाओं तक सीमित है।


प्रभारी का बयान

पीएचसी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. यतींद्र प्रसाद ने बताया कि भवन की खराब स्थिति को लेकर विभागीय अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गई है। हाल ही में भी रिपोर्ट भेजी गई थी। विभागीय स्तर पर मरम्मत योजना स्वीकृत हुई है, लेकिन कार्य शुरू होने का इंतजार है।


सरकार जहां एक ओर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं उन दावों की सच्चाई उजागर कर रही हैं। क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है, या फिर अब कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?



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