Bihar Crime News: बिहार के दानापुर व्यवहार न्यायालय में करीब 12 साल पुराने चंदन हत्याकांड का आखिरकार ऐसा क्लाइमैक्स आया, जिसे किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं कहा जा सकता। कहानी में शादी है, प्रेम प्रसंग है, पंचायत है, कथित साजिश है, हत्या को आत्महत्या दिखाने की कोशिश है और अब कोर्ट का बड़ा फैसला भी आ गया है। अदालत ने चंदन की हत्या के मामले में उसकी पत्नी अनिशा कुमारी और उसके प्रेमी पप्पू कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। एडीजे-1 कुमार गुंजन ने जुर्माने की राशि मृतक चंदन के पिता को देने का आदेश दिया है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में अनिशा के पिता उमेर यादव और भाई भीम यादव को पहले ही बरी किया जा चुका है। अब जरा कहानी को पीछे ले चलते हैं...
2008 में हुई शादी, शुरुआत में सब था ‘ऑल इज वेल’
नौबतपुर के रेगनियाबा गांव निवासी चंदन कुमार की शादी वर्ष 2008 में दुल्हिन बाजार के सिंघाड़ कोपा निवासी उमेर यादव की बेटी अनिशा से हुई थी। शादी के बाद कुछ समय तक जिंदगी ठीक-ठाक चलती रही। यानी फिल्म के शुरुआती सीन की तरह सबकुछ सामान्य था।लेकिन धीरे-धीरे कहानी ने करवट ली।आरोपों के मुताबिक, अनिशा के संबंध नौबतपुर निवासी पप्पू कुमार से थे। दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे और कथित तौर पर छिप-छिपकर मिलते थे। शादी के बाद भी यह संबंध खत्म नहीं हुआ। अब कहानी में पति चंदन की एंट्री होती है, जिसे धीरे-धीरे अपनी पत्नी और पप्पू के रिश्ते की भनक लगने लगी।
पति ने कथित तौर पर दोनों को देख लिया, फिर बढ़ा विवाद
मामले में आरोप लगाया गया कि चंदन ने अपनी पत्नी को पप्पू कुमार के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। इसके बाद घर का माहौल बिगड़ गया। चंदन ने इस संबंध का विरोध किया और अपने पिता सुदर्शन प्रसाद को भी इसकी जानकारी दी। मामला इतना बढ़ा कि मारपीट तक की नौबत आ गई।फिर गांव में पंचायत बैठी। यानी मामला पुलिस तक पहुंचने से पहले गांव के ‘लोकल कोर्ट’ में पहुंच गया। पंचायत में दोनों पक्षों को समझाया-बुझाया गया। बताया गया कि 13 जुलाई 2014 को समझौता भी हुआ था। पप्पू ने कथित तौर पर अनिशा से संबंध खत्म करने की बात मान ली थी। लेकिन फिल्म की कहानी में इंटरवल के बाद ट्विस्ट बाकी था।
अगले ही दिन हो गया चंदन का कत्ल
समझौते के अगले ही दिन यानी 14 जुलाई 2014 को चंदन की हत्या हो गई। पुलिस में दिए आवेदन के मुताबिक, चंदन के पिता सुदर्शन प्रसाद ने आरोप लगाया कि अनिशा ने अपने प्रेमी पप्पू कुमार समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर चंदन के साथ मारपीट की और उसकी हत्या कर दी।मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। आरोप यह भी लगाया गया कि हत्या को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। बताया गया कि कमरे में बाहर से ताला लगा दिया गया और आरोपी वहां से फरार हो गए।बेटे की मौत की खबर मिलते ही पिता सुदर्शन प्रसाद ने पुलिस को पूरी जानकारी दी। इसके बाद नौबतपुर थाने में अनिशा, पप्पू, उमेर यादव और भीम यादव के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
12 साल बाद कोर्ट ने सुनाया ‘क्लाइमैक्स’
पुलिस जांच के बाद मामला अदालत तक पहुंचा और वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चलती रही। आखिरकार अब इस पुराने हत्याकांड में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। दानापुर व्यवहार न्यायालय के एडीजे-1 कुमार गुंजन ने अनिशा कुमारी और पप्पू कुमार को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों पर 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने जुर्माने की राशि चंदन के पिता को देने का आदेश दिया।वहीं, अनिशा के पिता उमेर यादव और भाई भीम यादव को साक्ष्य के अभाव में पहले ही बरी किया जा चुका था।
‘प्यार’ की कहानी का अंत जेल की सलाखों के पीछे
जिस कहानी की शुरुआत शादी से हुई थी, उसमें रिश्तों की दरार आई, फिर कथित प्रेम प्रसंग सामने आया, पंचायत बैठी, समझौता हुआ और उसके ठीक अगले दिन चंदन की हत्या हो गई।करीब 12 साल बाद अदालत के फैसले ने इस कहानी का कानूनी क्लाइमैक्स तय कर दिया है। हालांकि, यह मामला यह भी दिखाता है कि रिश्तों में विवाद जब हिंसा की तरफ बढ़ता है तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है। जिस विवाद को पंचायत में समझौते से खत्म करने की कोशिश की गई थी, वही विवाद अगले दिन एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया। और अब इस कहानी में मूल भाव बस इतना है कि—कानून की रफ्तार भले धीमी हो, लेकिन अदालत में फैसला सबूतों के आधार पर ही होता है। इस मामले में दो आरोपितों को उम्रकैद मिली, जबकि दो अन्य आरोपित साक्ष्य के अभाव में बरी हो चुके हैं।





