Success Story: देर से ही सही, मगर मुकम्मल पाँव के छाले रंग लाते हैं, जो जलते हैं शिद्दत की आग में, वही सितारे बनके जगमगाते हैं... यह पंक्तियाँ मुरादाबाद के एक छोटे से गाँव में रहने वाली इल्मा अफ़रोज़ पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, जिन्होंने तमाम संघर्षों और अभावों के बाद भी अपनी कड़ी मेहनत के दम पर IPS बनने के सपने को सच कर दिखाया है.
महज 14 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति मुश्किल हो गई थी. पिता किसान थे और उनके निधन के बाद मां ने इल्मा और उनके छोटे भाई की परवरिश की. परिवार पर मुश्किलें थीं, लेकिन मां ने बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने दी.
इल्मा ने आगे चलकर UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2017 में 217वीं रैंक हासिल की. इसके बाद वह हिमाचल प्रदेश कैडर की 2018 बैच की IPS अधिकारी बनीं. गांव से शुरू हुआ उनका सफर दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क तक पहुंचा, लेकिन उन्होंने विदेश में करियर बनाने के बजाय भारत लौटकर सिविल सेवा में जाने का फैसला किया.
पिता की मौत के बाद शादी का दबाव
इल्मा जब छोटी थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था. परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. पिता के जाने के बाद रिश्तेदारों और समाज की तरफ से उनकी मां पर इल्मा की शादी करने का दबाव भी बनाया गया. कई लोगों का मानना था कि बेटी की पढ़ाई पर ज्यादा खर्च करने के बजाय उसकी शादी कर देनी चाहिए.
लेकिन उनकी मां ने इन बातों की परवाह नहीं की और इल्मा की पढ़ाई जारी रखी. आर्थिक तंगी के बावजूद इल्मा ने अपनी पढ़ाई पर ध्यान दिया. कई बार उन्हें मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ती थी.
दिल्ली आईं तो सामान में थे सिर्फ 4 जोड़ी कपड़े
इल्मा ने शुरुआती पढ़ाई बिलारी में की और 9वीं कक्षा के बाद मुरादाबाद शहर में पढ़ाई की. इसके बाद उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिला मिला. उन्होंने यहां फिलॉसफी में ऑनर्स की पढ़ाई की.
दिल्ली आने का समय भी उनके लिए आसान नहीं था. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब वह कॉलेज आई थीं, तब उनके सामान में सिर्फ चार जोड़ी सलवार-कमीज थे. ये कपड़े उनके गांव के एक परिचित ने सिलकर दिए थे.
कॉलेज में पढ़ाई के साथ डिबेट में हिस्सा लेना शुरू किया. शुरुआत में यह उनका शौक था, लेकिन बाद में प्रतियोगिताओं में मिलने वाली इनामी रकम से उनके कुछ खर्च भी चलने लगे. कभी 500 या 1000 रुपये तो कभी 5000 रुपये की पुरस्कार राशि उनके लिए काफी मायने रखती थी.
स्कॉलरशिप से पहुंचीं ऑक्सफोर्ड
सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद इल्मा को स्कॉलरशिप मिली और वह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी पहुंचीं. इसके बाद उन्होंने फ्रांस और अमेरिका के न्यूयॉर्क में भी काम किया.
विदेश में उन्हें काम के अवसर मिले, लेकिन उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया. उनका मानना था कि विदेश में मिली शिक्षा और अनुभव का इस्तेमाल अपने देश और अपने आसपास के लोगों के लिए किया जाना चाहिए.
इंग्लैंड में बर्तन धोकर भी चलाया खर्च
विदेश में पढ़ाई और रहने के दौरान इल्मा ने आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पार्ट टाइम काम भी किया. उन्होंने बर्तन धोने से लेकर पढ़ाने तक के काम किए. उनके लिए काम छोटा या बड़ा नहीं था. जरूरत के समय उन्होंने मेहनत करके अपना खर्च चलाया और पढ़ाई जारी रखी.
भारत लौटने पर बदली सोच
छुट्टियों में जब इल्मा अपने गांव लौटती थीं तो आसपास के लोग छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर उनके पास आने लगे. किसी को राशन कार्ड बनवाना था, किसी को फॉर्म भरने में मदद चाहिए थी तो किसी को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना था.
इन अनुभवों ने उनके मन में यह विचार मजबूत किया कि सिविल सेवा के जरिए लोगों के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा सकता है. इसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी.
UPSC में हासिल की 217वीं रैंक
भारत लौटकर इल्मा ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की. मेहनत के बाद उन्होंने 2017 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और 217वीं रैंक हासिल की. इसके बाद उनका चयन IPS के लिए हुआ और वह हिमाचल प्रदेश कैडर की 2018 बैच की अधिकारी बनीं.
इल्मा की सफलता में उनके भाई का भी साथ रहा. परिवार की आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने बहन की पढ़ाई को प्राथमिकता दी. बताया जाता है कि भाई ने दहेज के लिए पैसे जोड़ने के बजाय इल्मा की उच्च शिक्षा में मदद की.
जून 2026 में इल्मा अफरोज ने हिमाचल प्रदेश के नूरपुर की पुलिस अधीक्षक के तौर पर कार्यभार संभाला. इससे पहले वह बद्दी में भी SP के पद पर तैनात रह चुकी हैं.
बद्दी में तैनाती के दौरान उन्होंने अवैध खनन और नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ अभियान चलाया था. इसी वजह से वह चर्चा में भी रहीं.
कुंदरकी जैसे छोटे गांव से निकलकर दिल्ली, ऑक्सफोर्ड और न्यूयॉर्क तक पहुंचने और फिर भारत लौटकर IPS अधिकारी बनने तक इल्मा अफरोज की कहानी उनके संघर्ष के अलग-अलग पड़ावों को दिखाती है. आर्थिक मुश्किलों से लेकर विदेश में पार्ट टाइम काम करने और UPSC की तैयारी तक उन्होंने अपने सफर में कई चुनौतियों का सामना किया.





