Bihar News: जमुई में नाबालिग छात्रा से छेड़खानी की घटना से जुड़ा वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल होने के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। पुलिस के अनुसार, अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे आपत्तिजनक वीडियो को हटाने की कार्रवाई की गई है। घटना से जुड़े दो दर्जन से अधिक वीडियो फेसबुक और एक्स से टेकडाउन कराए गए हैं।
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, नाबालिग की पहचान उजागर करने और उससे संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में 120 सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब ऐसे अन्य लोगों, अकाउंट, पेज और वेबसाइट की पहचान कर रही है, जिन्होंने नाबालिग से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट या प्रसारित की है।
बिहार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसे वीडियो को शेयर या रीपोस्ट न करें। पुलिस का कहना है कि संवेदनशील सामग्री को आगे प्रसारित करने के बजाय इसकी सूचना संबंधित एजेंसी या पुलिस को देनी चाहिए।
यदि किसी नाबालिग से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर सामने आता है, तो उसे डाउनलोड कर आगे शेयर, रीपोस्ट या किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से सामग्री का प्रसार और बढ़ सकता है।
यदि किसी अकाउंट से ऐसी सामग्री पोस्ट की गई है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रिपोर्ट विकल्प के जरिए उसकी शिकायत की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर पुलिस या साइबर सेल को भी इसकी सूचना दी जा सकती है।
नाबालिग का नाम, चेहरा, पता, स्कूल, परिवार, मोहल्ला या ऐसी कोई भी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए, जिससे उसकी पहचान उजागर हो सके। POCSO अधिनियम की धारा 23 के तहत बच्चे की पहचान उजागर करने वाली जानकारी के प्रकाशन पर रोक है। इसमें नाम, पता, फोटो, परिवार, स्कूल, पड़ोस या पहचान सामने लाने वाली अन्य जानकारी शामिल हो सकती है।
यदि किसी महिला या बच्चे को तत्काल खतरा है या कोई घटना उसी समय हो रही है, तो 112 पर पुलिस सहायता ली जा सकती है। बिहार पुलिस की ओर से 112 को आपातकालीन हेल्पलाइन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग पीड़िता का चेहरा दिखाने या उसकी पहचान उजागर करने वाली सामग्री को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करना गंभीर कानूनी मामला है। पुलिस ऐसे अकाउंट संचालकों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है।





