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सावधान रहिये: कोरोना की लहर थम रही है लेकिन गंभीर मरीजों की तादाद में नहीं हो रही कमी, पटना के बडे अस्पतालों में ज्यादातर ICU बेड फुल

PATNA : बिहार में कोरोना की दूसरी लहर थमती जरूर दिख रही है लेकिन कोरोना के गंभीर मरीजों की तादाद में कोई खास कमी नहीं आ रही है. पटना के बडे सरकारी अस्पतालों को आंकडे तो यही बता रहे

सावधान रहिये: कोरोना की लहर थम रही है लेकिन गंभीर मरीजों की तादाद में नहीं हो रही कमी, पटना के बडे अस्पतालों में ज्यादातर ICU बेड फुल
Santosh Singh
4 मिनट

PATNA : बिहार में कोरोना की दूसरी लहर थमती जरूर दिख रही है लेकिन कोरोना के गंभीर मरीजों की तादाद में कोई खास कमी नहीं आ रही है. पटना के बडे सरकारी अस्पतालों को आंकडे तो यही बता रहे हैं. पटना के बडे सरकारी अस्पतालों के ज्यादातर ICU बेड फुल हैं. वहीं कोरोना से मरने वालों के सरकारी आंकडे भी बहुत ज्यादा नहीं कम रहे हैं.

कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या में कमी नहीं

बिहार में कोरोना के कहर में कमी के दावों के बीच हमने पटना के उन बडे सरकारी अस्पतालों में आईसीयू के बेड पर भर्ती मरीजों की संख्या के बारे में जानकारी ली, जहां सबसे बेहतर इलाज होने के दावे किये जाते हैं. पटना में ऐसे पांच सरकारी अस्पताल हैं. पटना एम्स,आईजीआईजीएमएस, पीएमसीएच, एनएमसीएच औऱ बिहटा का ईएसआईसी अस्पताल. इन पांचों अस्पतालों में आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की तादाद में कोई खास कमी नहीं आयी है.

एम्स औऱ बिहटा के सारे बेड फुल

पटना में कोविड के इलाज के सबसे प्रमुख अस्पताल पटना एम्स में आईसीयू के सारे बेड फुल है. यहां आईसीयू में 60 बेड हैं औऱ सब पर मरीज भर्ती हैं. वहीं बिहटा में खुले कोविड अस्पताल में भी आईसीयू के सारे बेड फुल हैं. पटना के ही एक औऱ बडे अस्पताल आईजीआईएमएस में आईसीयू के 50 बेड हैं. वहां 45 मरीज भर्ती हैं. सिर्फ 5 बेड को खाली बताया जा रहा है. वैसे कई मरीजों के परिजन ये भी आरोप लगा रहे हैं कि इन बेडों को वीआईपी मरीजों के लिए जानबूझ कर खाली रखा जाता है.

उधर सरकार के कोविड डेडिकेटेड अस्पताल एनएमसीएच औऱ पीएमसीएच में आईसीयू के बेड खाली हैं. एनएमसीएच में आईसीयू के 38 बेड हैं. इनमें से 21 पर मरीज भर्ती हैं यानि 17 बेड खाली बताये जा रहे हैं. उधर पीएमसीएच में आईसीयू के 25 बेड हैं. वहां 12 बेड खाली बताये जा रहे हैं. हालांकि कोरोना के गंभीर मरीजों को जब कहीं जगह नहीं मिलती है तभी एनएमसीएच औऱ पीएमसीएच का रूख करते हैं. 

पटना एम्स में कोविड के नोडल पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार ने बताया कि गंभीर मरीजों के लगातार आने की वजह से आईसीयू के बेड खाली नहीं हो रहे हैं. डॉ संजीव ने कहा कि जब कोविड मरीजों की हालत बिगड़ जाती है तो वे सबसे पहले एम्स का ही रूख करते हैं. वहीं पटना के निजी अस्पतालों के साथ साथ जिलों के सरकारी अस्पतालों में भी जब कोरोना मरीजों की हालात बेहद खराब हो जाती है तो उन्हें पटना एम्स रेफर कर दिया जाता है. 

मौत की संख्या में भी ज्यादा कमी नहीं, अब तक 5 हजार मौत

बिहार में कोरोना से मौत की संख्या में भी ज्यादा कमी नहीं हुई है. सूबे में सरकारी आंकडों के मुताबिक अब तक कोविड से 5 हजार मरीजों की मौत हो गयी है. शुक्रवार को ही कोरोना से 61 मरीजों की जान गयी. हालांकि ये सरकारी आंकडा है. श्मसान घाट से लेकर कब्रिस्तान का आंकडा ये कहता है कि कई गुणा ज्यादा मौत हुई है.

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