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नीतीश के जल-जीवन-हरियाली और 7 निश्चय की हकीकत जानिये : सीएम ने उद्घाटन किया, फिर भ्रष्टाचार की गंगा में बह गये 4 करोड़ रूपये

JAMUI : नीतीश कुमार के बहुप्रचारित 7 निश्चय और जल-जीवन हरियाली कार्यक्रम की हकीकत देखनी हो तो जमुई चले आइये. आइये और देखिये कि भ्रष्टाचार का जल कैसे माफियाओं के निश्चय को मजबू

नीतीश के जल-जीवन-हरियाली और 7 निश्चय की हकीकत जानिये : सीएम ने उद्घाटन किया, फिर भ्रष्टाचार की गंगा में बह गये 4 करोड़ रूपये
First Bihar
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JAMUI : नीतीश कुमार के बहुप्रचारित 7 निश्चय और जल-जीवन हरियाली कार्यक्रम की हकीकत देखनी हो तो जमुई चले आइये. आइये और देखिये कि भ्रष्टाचार का जल कैसे माफियाओं के निश्चय को मजबूत कर रहा है. सरकारी खजाने से 4 करोड़ रूपये लगाकर बड़े ताम-झाम के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई योजनाओं का एक साथ उद्घाटन किया. एक साल बाद सड़क ध्वस्त हो चुकी है, पेड़-पौधे विलुप्त हो गये हैं. हां, नीतीश कुमार के हाथों वाले उद्घाटन का शिलापट्ट जरूर मौजदू है लेकिन उस पर धूल का अंबार कुछ यूं बैठ गया है मानो सरकार की इज्जत वही बचा रहा है.


सरकारी दावों की हकीकत 
जमुई के गिद्धौरा प्रखंड का बानाडीह कुसुमा आहर बिहार में सरकारी इरादों की बेजोड़ बानगी बनकर खड़ा हो गया है. ठीक एक साल पहले यानि 10 जनवरी 2020 को नीतीश कुमार ने अपनी जल-जीवन-हरियाली यात्रा में कुसुमा आहर में 4 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन किया था. नीतीश की सात निश्चय योजना के तहत सड़कें बनी थी तो जल, जीवन, हरियाली योजना के तहत वृक्षारोपण से लेकर कुएं का निर्माण कराया गया था. हां, एक बड़ा शिलापट्ट भी लगा था जिस पर नीतीश कुमार के हाथों उनके ड्रीम प्रोजेक्ट के उद्घाटन होने की इबारत लिख दी गयी थी. अब इस शिलापट्ट पर धूल जमी है और पुआल का ढ़ेर जमा है. लोगों को न कोई काम नजर आता है और ना ही कोई शिलापट्ट.


10 जनवरी 2020 को नीतीश कुमार के उद्घाटन के लिए सात निश्चय योजना से चकाचक सड़के बनी थी. सड़क के किनारे पौधारोपण किया गया था. एक साल में वह सड़क टूट चुकी है. उसके आस पास कोई पेड़-पौधा नहीं नजर आता. सरकारी पैसे से जिस कुएं का निर्माण करा कर उससे सिंचाई कराने का एलान किया गया था और नीतीश ने खुद जिस कुएं का निरीक्षण किया था, उसका अस्तित्व अब समाप्त होने पर है.




सरकार कहती है कि भ्रष्टाचार नहीं है
नीतीश की सात निश्चय में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं लेकिन सरकार हमेशा इसे गलत करार देती रही है. लेकिन जिन योजनाओं का उद्घाटन खुद सीएम नीतीश ने किया हो वही भ्रष्टाचार का नमूना बन जाये तो बाकी योजनाओं का क्या हश्र हो रहा होगा ये बताने की जरूरत नहीं है. वैसे नीतीश कुमार ने बानाडीह के कुसुमा आहर में जल, जीवन, हरियाली योजना के तहत बगल के स्कूल परिसर में पेड़ पौधे लगाए थे, उसका अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है. सीएम साहब आये थे तो शौचालय का बना था, उनके जाने के बाद उस पर ताला लटका औऱ अब ताले पर भी जंग लग गया है.


नीतीश कुमार ने बानाडीह स्कूल में वेदों में हुए जिक्र के मुताबिक एक ब्रह्म वृक्ष भी लगाया था. ब्रह्म पेड़ के लिए बीच में तुलसी का पौधा और फिर चारों तरफ पीपल, पाकड़, बरगद, गूलर का पेड़ लगाया गया था. सीएम ने बताया था कि ये सारे पौधे मिलकर 10 से 12 साल के बाद एक पेड़ का रूप ले लेंगे, वही ब्रह्म पेड़ होगा. एक साल बाद किसी पौधे का कोई अता-पता नहीं है, सारे पौधे खुद ब्रह्म में विलीन हो गये.


जमुई आकर हार की समीक्षा कर लेते नीतीश
विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार का ज्यादातर वक्त इसमें बीत रहा है कि चुनाव में उनकी करारी हार क्यों हुई. पटना में बैठकर नीतीश कुमारऔर उनकी पार्टी हार के लिए तरह तरह का तर्क गढ रही है. शायद नीतीश जमुई के बानाडीह आ जाते तो उन्हें पता लगता कि जनता ने उन्हें क्यों नकार दिया.