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BPSC teacher recruitment : सहायक प्राध्यापकों को नियुक्ति का रास्ता साफ, राज्यपाल कार्यालय ने जारी किया आदेश; इस वजह से लगी थी रोक

बीपीएससी से अनुशंसित लेकिन योगदान से वंचित सहायक प्राध्यापकों को अब नियुक्ति का मौका मिलेगा। राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों को आदेश जारी किया।

BPSC teacher recruitment : सहायक प्राध्यापकों को नियुक्ति का रास्ता साफ, राज्यपाल कार्यालय ने जारी किया आदेश; इस वजह से लगी थी रोक
Tejpratap
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BPSC teacher recruitment : बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक पदों पर नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से लंबित मामले में अब राज्यपाल सह कुलाधिपति कार्यालय ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर देने का निर्देश दिया है, जिन्हें बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा विधिवत अनुशंसित किया गया था, लेकिन वे विभिन्न कारणों से अब तक योगदान नहीं कर पाए थे।


राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी इस आदेश में कहा गया है कि बीपीएससी की अनुशंसा के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक पद पर कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी जाएगी। इस संबंध में राज्यपाल के प्रधान सचिव राबर्ट एल. चोंग्थू ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कुलसचिवों को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।


आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन अभ्यर्थियों का चयन बीपीएससी के माध्यम से हुआ था और जिनकी नियुक्ति की अनुशंसा पहले ही की जा चुकी थी, वे अब संबंधित विश्वविद्यालयों में योगदान कर सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि ऐसे सभी मामलों की पहचान कर चयनित अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द योगदान का अवसर उपलब्ध कराया जाए, ताकि विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पद भरे जा सकें।


राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी निर्देश में यह भी कहा गया है कि यह निर्णय बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 की धारा 9.4 और 9.4 (क) के प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है। इसके अलावा बिहार राज्य मुकदमेबाजी नीति, 2011 के पारा 1.1 (ख) और पारा 4.1 (ग) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित न्यायादेश को ध्यान में रखते हुए यह आदेश जारी किया गया है।


नए निर्देश के तहत चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से ही उनकी सेवा वैध मानी जाएगी। हालांकि आदेश में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि अधिसूचना जारी होने की तिथि और वास्तविक रूप से कार्यभार ग्रहण करने की तिथि के बीच की अवधि के लिए वेतन निर्धारण का दावा मान्य नहीं होगा। यानी अभ्यर्थियों को केवल उसी तिथि से वेतन और अन्य सेवा लाभ मिलेंगे, जिस दिन से वे विश्वविद्यालय में औपचारिक रूप से कार्यभार संभालेंगे।


राज्य सरकार और राजभवन के इस निर्णय से उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे थे। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और छात्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।


बताया जा रहा है कि कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद वे उस समय कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके थे। अब राजभवन के आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसे सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया गया है।


दरअसल, वर्ष 2020-21 के दौरान कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण देशभर में शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां काफी हद तक प्रभावित हो गई थीं। इसी अवधि में कई ऐसे अभ्यर्थी, जिन्हें बीपीएससी द्वारा सहायक प्राध्यापक पद के लिए अनुशंसित किया गया था, परिस्थितियों के कारण विश्वविद्यालयों में समय पर योगदान नहीं दे सके थे। अब राज्यपाल कार्यालय के इस आदेश से ऐसे अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

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