Bihar Vigilance Bureau : SDO, CDPO, मुखिया, मजिस्ट्रेट, फॉरेस्टर सहित 8 भ्रष्टाचारियों की 4.14 करोड़ की संपत्तियां होंगी जब्त, निगरानी ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने सख्त रुख अपनाया है। आठ भ्रष्टाचारियों की 4.14 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव संबंधित प्राधिकार को भेजा गया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 02 Jan 2026 08:02:00 AM IST

Bihar Vigilance Bureau :  SDO, CDPO, मुखिया, मजिस्ट्रेट, फॉरेस्टर सहित 8 भ्रष्टाचारियों की 4.14 करोड़ की संपत्तियां होंगी जब्त, निगरानी ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई

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Bihar Vigilance Bureau : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्यूरो ने आठ भ्रष्टाचारियों की कुल 4.14 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव संबंधित प्राधिकार को भेज दिया है। प्राधिकार स्तर से अधिसूचना जारी होते ही इन संपत्तियों को विधिवत राज्य सरकार के अधीन सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


निगरानी ब्यूरो से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन आठ आरोपियों की संपत्तियां राज्यसात किए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ पदों पर रहे अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें दो तत्कालीन मुखिया, एक अधीक्षण अभियंता, एक न्यायिक दंडाधिकारी, एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एक अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), एक टैक्स दारोगा और एक सीडीपीओ शामिल हैं। इन सभी के विरुद्ध वर्ष 2012 से 2019 के बीच भ्रष्टाचार के गंभीर मामले दर्ज किए गए थे।


किन-किन अधिकारियों की संपत्ति होगी जब्त


सबसे पहले बात करें लखीसराय के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर दिलीप कुमार की, जिन पर वर्ष 2012 में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था। जांच में उनके पास आय से अधिक संपत्ति पाई गई, जिसके बाद उनकी 88.25 लाख रुपये की संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव भेजा गया है।


इसी तरह गोपालगंज के हथुआ अनुमंडल के तत्कालीन एसडीओ विजय प्रताप सिंह की 62.35 लाख रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। विजय प्रताप सिंह गोपालगंज में अपर समाहर्ता तथा दरभंगा प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में आयुक्त के सचिव पद पर भी रह चुके हैं। उनके विरुद्ध वर्ष 2015 में भ्रष्टाचार के तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे।


जनप्रतिनिधियों पर भी गिरी गाज


निगरानी ब्यूरो की कार्रवाई में जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। पश्चिम चंपारण जिले के लौरिया प्रखंड अंतर्गत राजमरहिया पकड़ी ग्राम पंचायत के तत्कालीन मुखिया मैनेजर यादव की 80.04 लाख रुपये की संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव है। वहीं समस्तीपुर जिले की जितवरिया ग्राम पंचायत के तत्कालीन मुखिया प्रमोद कुमार राय की 3.71 लाख रुपये की संपत्तियां भी जब्त की जाएंगी।


वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई

ग्रामीण कार्य विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश मांझी की 90.75 लाख रुपये की संपत्तियों को भी राज्यसात किए जाने का प्रस्ताव है। ओमप्रकाश मांझी को पहले ही राज्य सरकार की सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है, और अब उनकी अवैध संपत्तियों पर भी कानूनी शिकंजा कस गया है।


इसके अलावा दरभंगा के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार राय पर जुलाई 2019 में निगरानी द्वारा भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था। उनकी 41.12 लाख रुपये की संपत्तियों को राज्यसात करने की अनुशंसा की गई है।


अन्य आरोपी भी सूची में

सूची में मोतिहारी नगर परिषद के तत्कालीन टैक्स दारोगा अजय कुमार गुप्ता का नाम भी शामिल है, जिनकी 34.62 लाख रुपये की संपत्तियां जब्त की जाएंगी। वहीं पटना ग्रामीण की तत्कालीन सीडीपीओ फूलपरी कुमारी की 12.76 लाख रुपये की संपत्तियों को भी राज्यसात करने का प्रस्ताव भेजा गया है।


अब तक 97 करोड़ की संपत्तियों पर कार्रवाई

निगरानी ब्यूरो के अनुसार, अब तक 119 मामलों में लगभग 97 करोड़ रुपये की संपत्तियों को राज्यसात किए जाने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इनमें से 66 मामले (57 करोड़ रुपये) प्राधिकृत पदाधिकारी के न्यायालय में लंबित हैं, जबकि 32 मामले (20.80 करोड़ रुपये) हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं। इसके अलावा संपत्ति राज्यसात के दो मामले सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के रूप में लंबित हैं।निगरानी ने बताया कि अब तक 11 मामलों में 6.03 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अंतिम रूप से राज्यसात किया जा चुका है। वर्ष 2025 में अब तक आठ मामलों में संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव सौंपा गया है।


डीजी निगरानी का बयान

इस संबंध में निगरानी के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि भ्रष्टाचारियों की अवैध संपत्तियों को जब्त कर राज्यसात करने की प्रक्रिया लगातार जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के दायरे में रहते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।