Bihar Corruption Case : भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी, 8 भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की संपत्ति होगी जब्त; मुखिया से लेकर मजिस्ट्रेट तक का नाम शामिल

राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। वर्ष 2025 में आठ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की करीब 4.14 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव भेजा गया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 05 Jan 2026 03:12:06 PM IST

Bihar Corruption Case : भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी, 8 भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की संपत्ति होगी जब्त; मुखिया से लेकर मजिस्ट्रेट तक का नाम शामिल

- फ़ोटो

Bihar Corruption Case : राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। निगरानी से प्राप्त ठोस तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2025 में आठ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अवैध रूप से अर्जित करीब 4.14 करोड़ रुपये की संपत्तियों को राज्यसात (सरकारी अधीन) किए जाने का प्रस्ताव संबंधित सक्षम प्राधिकार को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही इन संपत्तियों को जब्त कर सरकार के अधीन लेने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार जिन आठ लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें दो तत्कालीन पंचायत मुखिया, एक तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, एक न्यायिक दंडाधिकारी, एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एक अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), एक टैक्स दारोगा और एक बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) शामिल हैं। इन सभी के विरुद्ध वर्ष 2012 से 2019 के बीच भ्रष्टाचार के गंभीर मामले दर्ज किए गए थे।


किन-किन पर है कार्रवाई

लखीसराय के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर दिलीप कुमार के खिलाफ वर्ष 2012 में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था। जांच में उनके पास आय से अधिक संपत्ति पाई गई, जिसके बाद 88.25 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति को राज्यसात करने का प्रस्ताव भेजा गया है।


वहीं गोपालगंज के हथुआ अनुमंडल में एसडीओ रह चुके विजय प्रताप सिंह की 62.35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने की तैयारी है। वे अपर समाहर्ता तथा दरभंगा प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में आयुक्त के सचिव पद पर भी कार्य कर चुके हैं। उनके खिलाफ वर्ष 2015 में भ्रष्टाचार के तीन अलग-अलग मामले दर्ज हुए थे।


पटना ग्रामीण की तत्कालीन सीडीपीओ फूलपरी देवी, मोतिहारी नगर परिषद के तत्कालीन टैक्स दारोगा अजय कुमार गुप्ता और समस्तीपुर जिले के जितवारिया ग्राम पंचायत के तत्कालीन मुखिया प्रमोद कुमार राय भी इस सूची में शामिल हैं। इन सभी की कुल 61 लाख रुपये से अधिक की संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया प्रस्ताव स्तर पर है।


1.70 करोड़ की संपत्ति पर भी नजर

वर्ष 2016 में ग्रामीण कार्य विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश मांझी के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। उन्हें पहले ही सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है और अब उनकी 90.75 लाख रुपये की संपत्ति को राज्यसात करने का प्रस्ताव भेजा गया है।


इसी तरह पश्चिम चंपारण के लौरिया प्रखंड अंतर्गत राजमारहिया पकड़ी पंचायत के तत्कालीन मुखिया मैनेजर यादव की 1.70 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति को राज्यसात करने की अनुशंसा की गई है। यह इस सूची की सबसे बड़ी राशि है।


न्यायिक अधिकारी भी जांच के दायरे में

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने जुलाई 2019 में दरभंगा के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार राय के विरुद्ध भी भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। जांच में उनकी 41.12 लाख रुपये की अवैध संपत्ति सामने आई, जिसे राज्यसात करने के लिए प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को भेजा गया है।


अब तक की स्थिति

निगरानी ब्यूरो ने अब तक कुल 119 मामलों में 96.76 करोड़ रुपये की संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव दिया है। इनमें से 66 मामले (57 करोड़ रुपये) सक्षम प्राधिकार की अदालत में लंबित हैं, जबकि 32 मामले (20.80 करोड़ रुपये) उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। दो मामले सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के रूप में दर्ज हैं और दो मामलों में विपक्षी पक्ष की अपील के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है। अब तक 11 मामलों में 6.03 करोड़ रुपये की संपत्तियां अंतिम रूप से राज्यसात की जा चुकी हैं।


अधिकारियों का कहना

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को राज्यसात करने की प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है। वर्ष 2025 में आठ मामलों में प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को सौंपा गया है और जल्द ही इन पर निर्णय होने की उम्मीद है। निगरानी की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।