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Bihar News : बिहार में टेंडर भरना हुआ महंगा! सरकार ने बढ़ाई फीस, करोड़ों के टेंडर पर देना होगा इतना शुल्क

बिहार सरकार ने ई-प्रोक्योरमेंट 2.0 प्रणाली के तहत टेंडर प्रोसेसिंग फीस और पंजीकरण शुल्क में संशोधन किया है। नई व्यवस्था में छोटे से लेकर बड़े टेंडरों तक शुल्क बढ़ाया गया है, जिससे सरकारी निविदा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है।

Bihar News : बिहार में टेंडर भरना हुआ महंगा! सरकार ने बढ़ाई फीस, करोड़ों के टेंडर पर देना होगा इतना शुल्क
Tejpratap
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Bihar News : बिहार सरकार ने राज्य के सभी विभागों, निगमों, बोर्डों और निकायों में लागू ई-प्रोक्योरमेंट (ई-क्रय 2.0) प्रणाली से जुड़े निविदा शुल्क (Tender Fee) में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और कार्यों के त्वरित निष्पादन के उद्देश्य से शुल्क संरचना का पुनरीक्षण करते हुए नई दरें लागू कर दी हैं। नई व्यवस्था के तहत टेंडर प्रोसेसिंग फीस (TPF) के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निविदाकारों के पंजीकरण एवं नवीकरण शुल्क में भी वृद्धि की गई है।


सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, राज्य के सभी सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्वायत्त निकायों और बोर्डों द्वारा जारी की जाने वाली निविदाओं पर अब संशोधित शुल्क लागू होगा। अधिकारियों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से शुल्क संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया था, जबकि तकनीकी ढांचे के विस्तार और रखरखाव की लागत लगातार बढ़ रही थी। ऐसे में ई-क्रय प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शुल्क में संशोधन आवश्यक हो गया था।


टेंडर प्रोसेसिंग फीस में हुआ बदलाव

नई शुल्क व्यवस्था के अनुसार अब 70 लाख रुपये तक की निविदा पर टेंडर प्रोसेसिंग फीस 1,000 रुपये निर्धारित की गई है। वहीं 70 लाख रुपये से लेकर तीन करोड़ रुपये तक की निविदा के लिए 5,000 रुपये शुल्क देना होगा। इसके अलावा तीन करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की निविदाओं पर 10,000 रुपये टेंडर प्रोसेसिंग फीस निर्धारित की गई है। इन सभी शुल्कों पर लागू कर (टैक्स) अलग से देय होगा।


सरकार का मानना है कि इस नई शुल्क व्यवस्था से निविदा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा सकेगा। साथ ही ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के संचालन, रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।


राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निविदाकारों के लिए नई दरें

बिहार सरकार ने राष्ट्रीय स्तर के निविदाकारों के लिए भी पंजीकरण शुल्क में बदलाव किया है। अब नए पंजीकरण के लिए 2,000 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि पंजीकरण के नवीकरण के लिए 1,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर के निविदाकारों के लिए शुल्क में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि की गई है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों या एजेंसियों को नए पंजीकरण के लिए 15,000 रुपये शुल्क देना होगा। इसके अलावा नवीकरण शुल्क 5,000 रुपये तय किया गया है।


सरकार ने अंतरराष्ट्रीय निविदाओं के लिए निविदा निष्पादन शुल्क (Tender Execution Fee) भी निर्धारित किया है। नई व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय टेंडरों के लिए 25,000 रुपये शुल्क लिया जाएगा। इस पर भी लागू कर अतिरिक्त रूप से देना होगा।


पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने पर जोर

सरकारी अधिकारियों के अनुसार ई-क्रय 2.0 प्रणाली के माध्यम से राज्य में सभी सरकारी खरीद और निर्माण कार्यों की निविदा प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जाती है। इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होता है और पारदर्शिता बढ़ती है। नई शुल्क संरचना लागू होने के बाद पोर्टल की तकनीकी क्षमता और सुरक्षा को और बेहतर बनाया जाएगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में सरकारी खरीद व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि छोटे ठेकेदारों और एजेंसियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। इसके बावजूद सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से निविदा प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद, तेज और प्रभावी बनेगी तथा राज्य में विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।