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Bihar teachers duty : शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, अब सिर्फ इन्हीं कामों में ही लगाई जाएगी जिम्मेदारी

बिहार सरकार ने शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक ड्यूटी को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब शिक्षकों को केवल जनगणना, चुनाव ड्यूटी और आपदा सहायता कार्यों में ही लगाया जाएगा। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन में यह जानकारी दी।

Bihar teachers duty : शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, अब सिर्फ इन्हीं कामों में ही लगाई जाएगी जिम्मेदारी
Tejpratap
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Bihar teachers duty : बिहार में शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगातार ड्यूटी लगाए जाने को लेकर लंबे समय से विवाद और असंतोष की स्थिति बनी हुई थी। इस बीच राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब शिक्षकों की ड्यूटी सीमित कार्यों तक ही रखी जाएगी। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विधानमंडल में इस संबंध में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि शिक्षकों को अब केवल तीन प्रमुख कार्यों में ही लगाया जाएगा, इसके अलावा किसी भी अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य में उनकी ड्यूटी नहीं लगेगी।


शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य के शिक्षक अपने मूल कार्य यानी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर घर-घर जाकर जनगणना या अन्य सरकारी गिनती से जुड़े कार्यों में सहयोग करेंगे। इसके अलावा चुनाव के दौरान चुनाव ड्यूटी और आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में भी शिक्षकों की सेवा ली जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तीनों कार्य प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन्हें राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है।


दरअसल, जेडीयू के प्रोफेसर वीरेंद्र नारायण यादव ने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने को लेकर एक गैर सरकारी संकल्प प्रस्ताव लाया था। इस प्रस्ताव पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि सरकार शिक्षकों के सम्मान और उनके शैक्षणिक दायित्वों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि शिक्षकों का अधिकतम समय पढ़ाई और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में ही लगे।


मंत्री ने आगे कहा कि सरकार शिक्षकों के मान-सम्मान में किसी भी तरह की कमी नहीं आने देगी। यदि किसी शिक्षक को लगता है कि उन्हें निर्धारित कार्यों के अलावा अन्य किसी गैर-शैक्षणिक कार्य में लगाया जा रहा है तो वे इसकी शिकायत संबंधित विभाग के पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं या व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर भी अपनी समस्या सरकार तक पहुंचा सकते हैं। सरकार ऐसी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करेगी और आवश्यक कार्रवाई भी सुनिश्चित करेगी।


शिक्षा मंत्री के इस बयान को शिक्षकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। लंबे समय से शिक्षक संगठनों की ओर से यह मांग उठाई जा रही थी कि उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं, सर्वेक्षण और अन्य प्रशासनिक कार्यों में बार-बार लगाया जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। कई बार शिक्षकों को शिक्षा से इतर कार्यों में लंबे समय तक व्यस्त रहना पड़ता था, जिससे स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था पर असर पड़ता था।


सरकार के इस फैसले से यह उम्मीद जताई जा रही है कि अब शिक्षक अपने मुख्य कार्य यानी शिक्षण पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार आने की संभावना भी बढ़ेगी। साथ ही छात्रों को बेहतर शिक्षण माहौल मिलने की उम्मीद है।


हालांकि, शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना, चुनाव और आपदा प्रबंधन जैसे कार्य राष्ट्रीय और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत जरूरी होते हैं। ऐसे में इन कार्यों में शिक्षकों की भागीदारी प्रशासनिक मजबूरी और संवैधानिक दायित्व का हिस्सा मानी जाती है।


राज्य सरकार के इस फैसले के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीनी स्तर पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है और शिक्षकों को वास्तव में गैर-शैक्षणिक कार्यों से कितनी राहत मिलती है। फिलहाल सरकार का यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।