1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 04 Jan 2026 01:59:10 PM IST
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GPS tracking sand : बिहार में अवैध बालू खनन, ढुलाई और बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब प्रदेश में बालू का परिवहन केवल जीपीएस (GPS) लगे वाहनों से ही किया जाएगा। इतना ही नहीं, बालू लदे प्रत्येक वाहन के लिए पहले से निर्धारित रूट तय किए जाएंगे, जिन पर चलना अनिवार्य होगा। खान एवं भूतत्व विभाग ने इस व्यवस्था का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश सभी संबंधित अधिकारियों और जिलों को दिया है।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि बालू घाटों से निकलने वाले वाहनों की निगरानी प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है। कई मामलों में बालू लदे वाहन तय रूट से हटकर दूसरे रास्तों से गुजरते हैं, जिससे अवैध ढुलाई और चोरी-छिपे बिक्री को बढ़ावा मिलता है। इसी समस्या को देखते हुए अब जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम को अनिवार्य किया गया है, ताकि हर वाहन की गतिविधियों पर रियल टाइम निगरानी रखी जा सके।
कंट्रोल रूम से होगी निगरानी
नई व्यवस्था के तहत खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा बनाए गए विशेष कंट्रोल रूम से जीपीएस ट्रैकिंग के जरिए बालू लदे वाहनों पर नजर रखी जाएगी। कंट्रोल रूम को यह जानकारी लगातार मिलती रहेगी कि कोई वाहन किस स्थान पर है, किस रूट से गुजर रहा है और क्या वह तय किए गए मार्ग से भटक रहा है या नहीं। जैसे ही कोई वाहन निर्धारित रूट से हटेगा, सिस्टम के जरिए इसकी जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंच जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, रूट बदलने या बिना अनुमति तय मार्ग से हटने वाले वाहनों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, वाहन जब्ती और परमिट रद्द करने जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। विभाग का मानना है कि इस कदम से बालू माफियाओं की मनमानी पर काफी हद तक अंकुश लगेगा।
अवैध खनन पर लगाम लगाने की कोशिश
बिहार में बालू अवैध खनन और उससे जुड़ी गतिविधियां लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही हैं। नदियों से अवैध तरीके से बालू निकासी न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है। कई जिलों में यह देखा गया है कि रात के अंधेरे में या प्रशासन की आंखों से बचकर अवैध खनन किया जाता है और फिर उसे अलग-अलग रास्तों से बाजार तक पहुंचाया जाता है।
खान एवं भूतत्व विभाग का कहना है कि जीपीएस आधारित इस नई व्यवस्था का मूल उद्देश्य इन्हीं अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है। जब हर वाहन की लोकेशन और मूवमेंट रिकॉर्ड में होगी, तो अवैध ढुलाई करना आसान नहीं रहेगा। इससे सरकार को यह भी पता चल सकेगा कि किन इलाकों में अवैध गतिविधियां ज्यादा हो रही हैं।
जिलों को दिए गए सख्त निर्देश
विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बालू के अवैध खनन, बिक्री और ढुलाई से जुड़े रास्तों और स्थानों की पहचान करें। इसके आधार पर स्थानीय प्रशासन को विशेष निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया है। जिलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बालू घाटों से निकलने वाले सभी अधिकृत वाहनों में जीपीएस सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा हो।
इसके अलावा, बालू परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की भी नियमित जांच की जाएगी। वाहन चालक के पास ई-चालान, परमिट और अन्य जरूरी कागजात होना अनिवार्य होगा। किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित वाहन और चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार को मिलेगा राजस्व, पर्यावरण को राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल अवैध खनन पर रोक लगेगी, बल्कि सरकारी राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। जब बालू की ढुलाई पारदर्शी और नियंत्रित होगी, तो रॉयल्टी और टैक्स की चोरी पर भी लगाम लगेगी। साथ ही नदियों और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने में भी मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, जीपीएस आधारित बालू परिवहन प्रणाली बिहार में खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि इसका सख्ती से पालन किया गया, तो आने वाले समय में अवैध बालू खनन और ढुलाई पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।