Bihar Mining Scam: बिहार में खनन विभाग से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि खनन एवं भूतत्व विभाग के डिजिटल पोर्टल में छेड़छाड़ कर करीब 350 करोड़ रुपये मूल्य के बालू का अवैध कारोबार किया गया। इस मामले में एनआईसी (NIC) के कुछ कर्मियों और 100 से अधिक लाइसेंसधारी कारोबारियों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।
जानकारी के अनुसार, घोटाले को अंजाम देने के लिए विभाग के ‘खनन सॉफ्ट’ पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाई गई। आरोप है कि कारोबारियों ने जिला खनन कार्यालय की स्वीकृति के बिना ही फर्जी दस्तावेज अपलोड किए और बालू उठाव की निर्धारित सीमा को सॉफ्टवेयर में बढ़वा लिया। इससे तय मात्रा से कहीं अधिक बालू का उठाव और कारोबार किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे खेल में डिजिटल सिस्टम के साथ गंभीर स्तर पर छेड़छाड़ की गई। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में सामने आया है कि मोबाइल ओटीपी आधारित सुरक्षा प्रणाली को भी कथित रूप से बाईपास कर दिया गया था। इसके बाद डेटाबेस और सॉफ्टवेयर में बदलाव कर अवैध तरीके से ई-चालान जारी किए गए और बड़े पैमाने पर बालू की बिक्री की गई।
मामले का खुलासा होने के बाद अक्टूबर 2025 में पटना साइबर थाने में पहली प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क राज्य के 17 जिलों तक फैला हुआ था और इसमें बड़ी संख्या में लाइसेंसधारी कारोबारी शामिल थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि बालू भंडारण और बिक्री के लिए जारी लॉगिन आईडी एवं पासवर्ड का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। जिन लाइसेंसधारियों को सीमित मात्रा में कारोबार की अनुमति थी, उन्होंने सिस्टम में बदलाव कर निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक बालू की बिक्री कर डाली।
फिलहाल इस मामले से जुड़े 17 जिलों में कुल 62 केस दर्ज किए गए हैं। आर्थिक अपराध इकाई की विशेष टीम पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ कैसे की गई, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और सरकारी खजाने को वास्तविक रूप से कितना नुकसान पहुंचा।
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है और कई प्रभावशाली लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। इस कारण यह मामला अब बिहार के सबसे बड़े कथित डिजिटल खनन घोटालों में से एक माना जा रहा है।
वहीं, अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच अभी जारी है।




