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Bihar Sand Ghat: बिहार में नए बालू घाटों की होगी पहचान, 10 से 12% तक बढ़ सकती है घाटों की संख्या; सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी

बिहार में बालू की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार नए बालू घाटों की पहचान करेगी। सभी जिलों में संभावित स्थलों का निरीक्षण होगा और उपयुक्त घाटों को DSR में शामिल किया जाएगा। घाटों की संख्या 10 से 12% तक बढ़ने की उम्मीद है।

Bihar Sand Ghat
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Tejpratap
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6 मिनट

Sand Ghat Auction: बिहार में बालू की उपलब्धता बढ़ाने और निर्माण कार्यों के लिए इसकी आपूर्ति को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब ऐसे नए बालू घाटों की तलाश की जा रही है, जहां पर्याप्त मात्रा में बालू मौजूद है, लेकिन अभी तक उन्हें नीलामी के दायरे में नहीं लाया गया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी जिलों में संभावित नए बालू घाटों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है।

सरकार की इस पहल से आने वाले समय में बिहार में बालू घाटों की संख्या बढ़ सकती है। विभागीय अनुमान के मुताबिक, नई जगहों की पहचान और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य में बालू घाटों की संख्या में करीब 10 से 12 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे बालू की उपलब्धता बढ़ने के साथ निर्माण क्षेत्र को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

पहले तैयार होगी संभावित घाटों की सूची

सरकार की योजना के तहत सबसे पहले प्रत्येक जिले में ऐसे स्थानों की सूची तैयार की जाएगी, जहां बालू का पर्याप्त भंडार मौजूद होने की संभावना है। अधिकारियों को इन संभावित स्थलों की पहचान करने के लिए कहा गया है। सूची तैयार होने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर इन स्थानों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे।

निरीक्षण के दौरान केवल बालू की मात्रा ही नहीं, बल्कि घाट को नीलामी योग्य बनाने से जुड़े अन्य जरूरी पहलुओं की भी जांच की जाएगी। इसके आधार पर अधिकारियों की टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। यानी किसी जगह को सिर्फ बालू उपलब्ध होने के आधार पर सीधे नीलामी के लिए नहीं भेजा जाएगा, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसकी जांच की जाएगी।

DSR में दर्ज होंगे नए बालू घाट

स्थलीय निरीक्षण के बाद जो स्थान सभी जरूरी मानकों पर उपयुक्त पाए जाएंगे, उन्हें संबंधित जिले की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट यानी DSR (District Survey Report) में शामिल किया जाएगा। DSR में बदलाव इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

दरअसल, बालू घाटों की नीलामी से पहले संबंधित क्षेत्र में खनिज की उपलब्धता और अन्य पहलुओं का सर्वेक्षण किया जाता है। इसी आधार पर घाटों को आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। ऐसे में नए संभावित घाटों को DSR में शामिल किए जाने के बाद ही उनकी नीलामी की राह आसान होगी।

10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकती है घाटों की संख्या

खान एवं भूतत्व विभाग को उम्मीद है कि इस अभियान के बाद राज्य में नीलामी के लिए उपलब्ध बालू घाटों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक यह वृद्धि करीब 10 से 12 प्रतिशत तक हो सकती है।

हालांकि, वास्तविक संख्या स्थलीय निरीक्षण और DSR में संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। कितने स्थान बालू घाट के रूप में उपयुक्त पाए जाते हैं और कितने घाट नीलामी की प्रक्रिया तक पहुंचते हैं, यह अधिकारियों की जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।

निर्माण कार्यों को मिल सकती है बड़ी राहत

बिहार में बालू की मांग निर्माण कार्यों के कारण लगातार बनी रहती है। मकान बनाने से लेकर सड़क, पुल और दूसरी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में बालू की बड़ी जरूरत होती है। ऐसे में उपलब्धता बढ़ाने की सरकार की कोशिश का सीधा असर निर्माण क्षेत्र पर पड़ सकता है।

नए घाट नीलामी के दायरे में आने और वहां से बालू की आपूर्ति शुरू होने के बाद बाजार में उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बेहतर हो सकता है। सरकार का उद्देश्य भी यही है कि निर्माण कार्यों के लिए जरूरत के मुताबिक बालू उपलब्ध हो और लोगों को इसकी कमी का सामना न करना पड़े।

कीमतों पर भी पड़ सकता है असर

बालू की उपलब्धता बढ़ने से बाजार में इसकी आपूर्ति बेहतर होने की संभावना है। सामान्य तौर पर जब किसी वस्तु की आपूर्ति बढ़ती है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। ऐसे में नए बालू घाटों के खुलने से आम लोगों और निर्माण कारोबार से जुड़े लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।

हालांकि, बालू की अंतिम कीमत कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करती है। इसलिए नए घाटों की पहचान के बाद कीमतों में कितनी कमी आएगी, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।

सरकार को मिलेगा अतिरिक्त राजस्व

नए बालू घाटों की नीलामी से सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने की भी उम्मीद है। यदि अधिक घाट नीलामी के लिए उपलब्ध होते हैं तो खनन गतिविधियों का दायरा बढ़ेगा और सरकार के राजस्व में भी इजाफा हो सकता है।

फिलहाल जिलों में संभावित स्थलों की पहचान का काम शुरू करने की तैयारी है। इसके बाद स्थलीय निरीक्षण, रिपोर्ट तैयार करने और DSR में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया होगी। इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिहार में वास्तव में कितने नए बालू घाट नीलामी के लिए उपलब्ध हो सकेंगे।

कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल बालू की उपलब्धता बढ़ाने, निर्माण कार्यों को गति देने और सरकारी राजस्व में इजाफा करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। अब सबकी नजर जिलों से आने वाली सर्वेक्षण रिपोर्ट और DSR में होने वाले बदलाव पर है।