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पटना में बिहार राजस्व सेवा अधिकारियों का महाजुटान, अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने का ऐलान

पटना में राजस्व सेवा अधिकारियों ने कॉन्क्लेव के बाद हड़ताल जारी रखने का फैसला लिया। DCLR पद पर पुनः पदस्थापन तक काम पर लौटने से इनकार।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 17, 2026, 5:31:33 PM

बिहार न्यूज

- फ़ोटो सोशल मीडिया

PATNA: पटना से बड़ी खबर सामने आई है, जहां बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों का महाजुटान कॉन्क्लेव संपन्न हुआ। इस दौरान अधिकारियों ने 9 मार्च से जारी सामूहिक अवकाश को अनिश्चितकाल तक जारी रखने का फैसला लिया है।अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक DCLR (डिप्टी कलेक्टर लैंड रिफॉर्म्स) पद पर पुनः पदस्थापन नहीं किया जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं होगी।


कॉन्क्लेव में यह भी कहा गया कि सरकार का हालिया कैबिनेट निर्णय पटना हाईकोर्ट के आदेश और संवर्ग नियमावली का उल्लंघन है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। संघ ने 300 अधिकारियों के काम पर लौटने की खबर को पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया है। अधिकारियों का कहना है कि आंदोलन पहले से अधिक मजबूत हो रहा है। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि सरकार उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं करती है, तो 100 प्रतिशत राजस्व अधिकारी इस आंदोलन में शामिल हो जाएंगे।


बिहार बिहार राजस्व सेवा संघ और बिरसा यूनाइटेड संयुक्त मंच के तत्वावधान में आयोजित महाजुटान कॉन्क्लेव में सभी जिलों, निदेशालयों और मुख्यालयों के बिहार राजस्व सेवा (बि.रा.से.) के अधिकारियों ने अभूतपूर्व एकता का प्रदर्शन किया। इस कॉन्क्लेव में दिनांक 29 जनवरी 2026 के कैबिनेट निर्णय संख्या 23 एवं 30 (एवं शुद्धिपत्र 6) के विरोध में 9 मार्च 2026 से शुरू हुए सामूहिक अवकाश कार्यक्रम को जारी रखने का संकल्प दोहराया गया। इन निर्णयों के द्वारा भूमि सुधार उप समाहर्ता (डी.सी.एल.आर.) के पद को बिहार राजस्व सेवा संवर्ग से हटाकर बिहार प्रशासनिक सेवा (बि.प्र.से.) के अधिकारियों द्वारा भरे जाने का प्रावधान किया गया है।


यह निर्णय माननीय उच्च न्यायालय, पटना के द्वारा CWJC No. 5902/2024 में पारित आदेश और बिहार राजस्व सेवा संवर्ग नियमावली, 2010 का स्पष्ट उल्लंघन है। अधिकारियों ने सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया कि जब तक कैबिनेट इन अन्यायपूर्ण निर्णयों को वापस नहीं ले लेती और डी.सी.एल.आर. के पद को बिहार राजस्व सेवा संवर्ग में बहाल नहीं कर दिया जाता, और राजस्व सेवा के पदाधिकारियों का पदस्थापन नहीं किया जाता तब तक यह संघर्ष और सामूहिक अवकाश अनिश्चित काल तक जारी रहेगा।


महाजुटान कॉन्क्लेव में पूरे बिहार से बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों ने भाग लिया, जो इन निर्णयों के सेवा वितरण और संवर्ग की अखंडता पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव को रेखांकित करता है। मंच ने इस बात पर जोर दिया कि यह निर्णय न केवल अनैतिक है, बल्कि यह राज्य की राजस्व प्रशासन प्रणाली की नींव को भी कमजोर करता है। यह कदम एक स्थापित संवर्ग संरचना को मनमाने ढंग से बदलने का एक खतरनाक उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो एक वैधानिक प्रक्रिया (संवर्ग नियमावली, 2010) के माध्यम से बनाई गई थी।


इसके अतिरिक्त, यह निर्णय माननीय उच्च न्यायालय के उस फैसले की सीधी अवमानना है, जिसमें यह आदेशित है कि बिहार राजस्व सेवा के पदाधिकारियों का पदस्थापन डी.सी.एल.आर. के पद पर अविलम्ब किया जाए। कार्यपालिका एक प्रशासनिक निर्णय के माध्यम से न्यायिक आदेश को निरस्त नहीं कर सकती है वो भी तब जबकि माननीय उच्च न्यायालय पटना में बाद संख्या CWJC No. 5902/2024 में पारित आदेश का अनुपालन नहीं करने के कारण अवमानना वाद संख्या MJC 2380/2025 लम्बित है। डी.सी.एल.आर. के पद राजस्व प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हैं और एक अलग सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति, जिनके पास राजस्व मामलों में विशेष प्रशिक्षण और अनुभव की कमी हो सकती है, लोक सेवा वितरण की दक्षता और प्रभावशीलता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी, जिससे आम नागरिकों को हानि होगी।


 इस कदम ने बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों के पूरे संवर्ग का मनोबल बुरी तरह से तोड़ दिया है, क्योंकि यह एक प्रमुख पदोन्नति के अवसर को छीनता है और उनकी सेवा का अवमूल्यन करता है। बिहार राजस्व सेवा संघ और बिरसा यूनाइटेड संयुक्त संघर्ष मंच के बारे में यह मंच स्थापित नियमों और अदालती फैसलों के अनुसार बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों के अधिकारों और संवर्ग की अखंडता की रक्षा के लिए समर्पित है। मंच राज्य सरकार से न्याय और संवर्ग नियमों को बनाए रखने के लिए तत्काल पुनर्विचार करने और विवादित कैबिनेट निर्णयों को तुरंत रद्द करने का आह्वान करता है। 


मंच सरकार एवं विभाग से यह आग्रह करता है कि राजस्व सेवा के पदों पर राजस्व सेवा के अधिकारियों का ही पदस्थापन किया जाए जिसकी शुरुआत DCLR एवं DLAO के पदों पर पदस्थापन से की जाए। साथ ही मंच यह भी आग्रह करता है कि संघ के पदधारकों पर अनावश्यक कार्रवाई करने की बजाय समस्या के हल पर बल दिया जाये। मंच इस भ्रामक ख़बर का पुरज़ोर खण्डन करता है जिसमें करीब 300 अधिकारियों के अवकाश से वापस आने की बात कही जा रही है। सभी अधिकारी अपनी माँगों को लेकर सामूहिक अवकाश पर अडिग हैं। यदि माँगें पूरी नहीं हुई तो राजस्व सेवा के शत-प्रतिशत अधिकरी सामूहिक अवकाश पर होंगे।