पटनाः बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने विभिन्न जिलों में कार्यरत 12 राजस्व अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की है। इस कार्रवाई के साथ ही पिछले करीब दो महीनों में कार्रवाई झेलने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की कुल संख्या बढ़कर 82 हो गई है। विभाग का कहना है कि भ्रष्टाचार, लापरवाही, अनियमितता और सरकारी निर्देशों की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि सरकार राजस्व प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और जनहित के अनुरूप बनाने के लिए लगातार सख्त फैसले ले रही है। उन्होंने दोहराया कि विभाग में "जीरो टॉलरेंस" की नीति लागू है और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा विभिन्न मामलों की समीक्षा, शिकायतों की जांच और प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले कई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय आरोप पत्र गठित किए गए हैं, जबकि कुछ अधिकारियों पर वेतन वृद्धि रोकने सहित अन्य प्रशासनिक दंड लगाए गए हैं। वहीं कुछ मामलों में विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया अभी जारी है।
इन अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र
विभाग के अनुसार भू-अर्जन कार्यालय, मुंगेर में पदस्थापित राजस्व अधिकारी-सह-कानूनगो अरविंद कुमार, वैशाली जिले के राघोपुर अंचल के अंचल अधिकारी दीपक कुमार तथा मधुबनी जिले के बिस्फी की तत्कालीन अंचल अधिकारी वंदना कुमारी के खिलाफ विभागीय आरोप पत्र गठित किए गए हैं। इन मामलों में आरोपों की विस्तृत जांच आगे भी जारी रहेगी।
कई अधिकारियों पर लगा दंड
इसके अलावा गोपालगंज सदर के अंचल अधिकारी रजत कुमार वर्णवाल, सारण जिले के एकमा के अंचल अधिकारी अमलेश कुमार, औरंगाबाद के गोह के तत्कालीन अंचल अधिकारी विश्वजीत नीलांकर, औरंगाबाद के तत्कालीन अंचल अधिकारी अंशु कुमार सिंह तथा समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर के तत्कालीन अंचल अधिकारी राजन कुमार के खिलाफ वेतन वृद्धि रोकने सहित विभिन्न प्रकार के विभागीय दंड लगाए गए हैं।
चार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी
राजस्व विभाग ने पश्चिम चंपारण के रामनगर के तत्कालीन अंचल अधिकारी उदय शंकर मिश्रा, मुजफ्फरपुर के कुढ़नी के तत्कालीन अंचल अधिकारी रणभू ठाकुर, वैशाली के हाजीपुर की तत्कालीन अंचल अधिकारी अंजली कुमारी तथा रोहतास के सासाराम के तत्कालीन अंचल अधिकारी सुधीर कुमार ओंकारा के खिलाफ भी विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। इन मामलों में नियमानुसार जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
दो महीने में 82 अधिकारियों पर कार्रवाई
डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने बताया कि उन्होंने विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद लगातार लंबित मामलों की समीक्षा करवाई है। इसी क्रम में पिछले दो महीनों के दौरान अब तक कुल 82 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। इन मामलों में दाखिल-खारिज में गड़बड़ी, भ्रष्टाचार, सरकारी कार्यों में लापरवाही, अनुशासनहीनता और विभागीय निर्देशों की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता आम लोगों को समयबद्ध और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराना है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की वजह से जनता को परेशानी होती है या सरकारी कार्य प्रभावित होता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
ईमानदार अधिकारियों को मिलेगा संरक्षण
राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी नियमों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से काम करेंगे, उन्हें हर स्तर पर संरक्षण और सहयोग मिलेगा। लेकिन जो लोग अपने पद का दुरुपयोग करेंगे या भ्रष्टाचार एवं अनियमितता में लिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पूरे राजस्व तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता की संस्कृति विकसित करना है ताकि लोगों को दाखिल-खारिज, भूमि विवाद, भू-अर्जन और अन्य राजस्व सेवाओं के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मंत्री ने अंत में कहा कि जनता के हितों से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में भी किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की शिकायत सही पाई जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सरकार का लक्ष्य साफ है—राजस्व विभाग को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना, ताकि आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हो सके।





