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Bihar Politics : राज्यसभा चुनाव की शोर के बीच ‘इफ्तार डिप्लोमेसी’ गरमाई, तेजस्वी–ओवैसी मुलाकात पर सबकी नजर, नीतीश और चिराग भी देंगे दावत

बिहार में राज्यसभा चुनाव के बीच इफ्तार पार्टियों ने सियासी रंग ले लिया है। पटना में AIMIM की इफ्तार पार्टी में तेजस्वी यादव के शामिल होने की संभावना है, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और चिराग पासवान भी अलग-अलग इफ्तार दावत आयोजित करने जा रहे हैं।

Bihar Politics : राज्यसभा चुनाव की शोर के बीच ‘इफ्तार डिप्लोमेसी’ गरमाई, तेजस्वी–ओवैसी मुलाकात पर सबकी नजर, नीतीश और चिराग भी देंगे दावत
Tejpratap
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 Bihar Politics : बिहार में राज्यसभा चुनाव के बीच सियासत का माहौल और भी गर्म हो गया है। रमजान के महीने में आयोजित होने वाली इफ्तार पार्टियां इस बार सिर्फ धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम नहीं रह गई हैं, बल्कि इनका रंग पूरी तरह से राजनीतिक हो गया है। पटना में अलग-अलग राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं और इसे ‘इफ्तार डिप्लोमेसी’ के तौर पर देखा जा रहा है।


दरअसल, पटना में आज ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की ओर से आयोजित इफ्तार पार्टी में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के शामिल होने की संभावना है। इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा है। सीमांचल क्षेत्र की राजनीति और मुस्लिम वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति के बीच तेजस्वी यादव का AIMIM के मंच पर जाना कई बड़े राजनीतिक संकेत दे रहा है। इस मुलाकात पर सत्ता पक्ष की भी पैनी नजर बनी हुई है।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीमांचल में AIMIM की मौजूदगी पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुई है। ऐसे में तेजस्वी यादव का इस इफ्तार कार्यक्रम में शामिल होना आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। भले ही इसे सामाजिक कार्यक्रम बताया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे संभावित रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


इधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी राज्यसभा चुनाव के बाद अपने आवास पर भव्य ‘दावत-ए-इफ्तार’ आयोजित करने जा रहे हैं। पटना के सबसे हाई-प्रोफाइल पते 1 अणे मार्ग पर 18 मार्च को यह खास कार्यक्रम होगा। जानकारी के मुताबिक राज्यसभा चुनाव के परिणामों की औपचारिक घोषणा 16 मार्च को होने के बाद मुख्यमंत्री आवास में इस दावत का आयोजन किया जाएगा।


बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री आवास के दरवाजे साल में केवल एक बार इस तरह के इफ्तार कार्यक्रम के लिए खुलते हैं। इस बार यह आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नई राजनीतिक पारी के जश्न के रूप में भी देखा जा रहा है। इस कार्यक्रम में कई बड़े राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किए जाने की संभावना है।


वहीं, इफ्तार की इस राजनीतिक दौड़ में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान भी पीछे नहीं हैं। चिराग पासवान ने 16 मार्च को अपनी पार्टी के पटना स्थित कार्यालय में इफ्तार पार्टी आयोजित करने का ऐलान किया है। दिलचस्प बात यह है कि उसी दिन राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान और परिणामों की घोषणा भी होनी है।


ऐसे में चिराग पासवान की यह इफ्तार पार्टी भी राजनीतिक संदेश देने वाली मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनावी नतीजों के बीच आयोजित यह दावत यह संकेत दे सकती है कि आने वाले समय में चिराग पासवान की पार्टी किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ेगी और किन दलों के साथ समीकरण मजबूत करने की कोशिश करेगी।


बिहार की राजनीति में ‘इफ्तार डिप्लोमेसी’ कोई नई बात नहीं है। रमजान के महीने में आयोजित इफ्तार पार्टियों के जरिए राजनीतिक दल अक्सर सामाजिक संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ अपने राजनीतिक रिश्तों को भी मजबूत करने की कोशिश करते हैं। कई बार ऐसे आयोजनों में अलग-अलग दलों के नेता एक मंच पर दिखाई देते हैं, जिससे नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलें भी लगने लगती हैं।


इस बार भी कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है। एक ओर AIMIM के इफ्तार में तेजस्वी यादव की संभावित मौजूदगी चर्चा में है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर होने वाली दावत-ए-इफ्तार पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। वहीं चिराग पासवान की इफ्तार पार्टी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।


कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव के बीच बिहार की राजनीति में इफ्तार पार्टियां केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गई हैं, बल्कि ये सियासी रणनीति और शक्ति प्रदर्शन का महत्वपूर्ण माध्यम बनती नजर आ रही हैं। आने वाले दिनों में इन आयोजनों से कौन-से नए राजनीतिक संकेत निकलते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।