1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 05, 2026, 8:24:57 AM
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BIHAR POLICE : बिहार में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बिहार पुलिस को आधुनिक हथियारों से लैस करने के लिए राज्य सरकार ने करीब 43 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक पिस्टल और प्रशिक्षण के लिए विशेष गोला-बारूद खरीदने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से पुलिस बल की कार्यक्षमता और अपराध नियंत्रण की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
गृह विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है। इसके बाद अब हथियारों की खरीद की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक हथियारों की उपलब्धता से पुलिसकर्मी न सिर्फ बेहतर तरीके से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर पाएंगे, बल्कि आपात स्थितियों में भी अधिक प्रभावी कार्रवाई कर सकेंगे।
4000 आधुनिक पिस्टल खरीदे जाएंगे
योजना के तहत कुल 4000 अत्याधुनिक 9 एमएम सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल खरीदी जाएंगी। ये पिस्टल देश की प्रतिष्ठित इशापुर राइफल फैक्ट्री से ली जाएंगी, जो उच्च गुणवत्ता के हथियार निर्माण के लिए जानी जाती है। खरीद प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में 2500 पिस्टल और दूसरे चरण में 1500 पिस्टल की आपूर्ति की जाएगी।
इन पिस्टलों की खरीद पर लगभग 42 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। आधुनिक तकनीक से लैस ये हथियार पुलिसकर्मियों को अधिक सटीकता और तेजी से कार्रवाई करने में मदद करेंगे। इससे अपराधियों पर लगाम कसने में भी मदद मिलेगी।
प्रशिक्षण के लिए विशेष गोलियां
केवल हथियार ही नहीं, बल्कि पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए ब्लैंक (खाली) गोलियों की खरीद की जाएगी, जिन पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ये गोलियां प्रशिक्षण के दौरान इस्तेमाल होती हैं और वास्तविक गोली के बिना ही फायरिंग का अनुभव देती हैं।
इन गोलियों की खरीद देश की दो प्रमुख रक्षा इकाइयों से की जाएगी। 7.62 एमएम की 60 हजार ब्लैंक गोलियां खड़की फैक्ट्री पुणे से लाई जाएंगी, जबकि 5.56 एमएम की 60 हजार गोलियां वरनगांव फैक्ट्री से खरीदी जाएंगी।
क्या होती हैं ब्लैंक गोलियां
ब्लैंक गोलियां विशेष प्रकार की होती हैं, जिनमें असली बुलेट नहीं होती। इनमें केवल गनपाउडर और कागज या प्लास्टिक का वाड होता है। फायर करने पर इनमें से तेज आवाज और फ्लैश निकलता है, जिससे वास्तविक फायरिंग जैसा अनुभव मिलता है। इन्हें मुख्य रूप से प्रशिक्षण और अभ्यास के लिए इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पुलिसकर्मी बिना जोखिम के हथियार चलाने की तकनीक सीख सकें।
पुलिस की क्षमता होगी और मजबूत
इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य बिहार पुलिस को तकनीकी रूप से मजबूत और आधुनिक बनाना है। आज के बदलते अपराध स्वरूप को देखते हुए पुलिस बल के पास अत्याधुनिक संसाधनों का होना बेहद जरूरी हो गया है। बेहतर हथियारों से लैस होने पर पुलिस न केवल अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सकेगी, बल्कि आम जनता की सुरक्षा भी और अधिक सुनिश्चित हो सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही पुलिसकर्मियों का मनोबल भी बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें बेहतर उपकरण और प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह फैसला राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देने वाला साबित हो सकता है। आधुनिक हथियारों और बेहतर प्रशिक्षण के साथ बिहार पुलिस आने वाले समय में अपराध नियंत्रण में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार दिख रही है।